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चंबल में हुआ था महात्मा गांधी का अस्थि विसर्जन, सेना ने विमान से की थी पुष्वर्षा, कोटा के इस स्कूल में रखा था कलश

Kota News: गत वर्षों में शिक्षा नगरी का विकास तो हुआ, लेकिन उनसे जुड़ी यादों को संजोने का कोई विशेष कार्य नहीं हुआ, इससे गांधीजी की यादें धूमिल होती जा रही है।

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कोटा

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Akshita Deora

Jan 30, 2026

Mahtma Gandhi

महात्मा गांधी स्कूल (फोटो: पत्रिका)

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2026: सत्य अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें कोटा से भी जुड़ी हुई हैं। रामपुरा में महात्मा गांधी स्कूल तो, छोटी समाध के पास स्मारक और गांधी चौक गांधीजी की याद दिलाते हैं।

गत वर्षों में शिक्षा नगरी का विकास तो हुआ, लेकिन उनसे जुड़ी यादों को संजोने का कोई विशेष कार्य नहीं हुआ, इससे गांधीजी की यादें धूमिल होती जा रही है। कहीं अतिक्रमियों का डेरा है तो कहीं गंदगी के बीच अपना ही स्मारक को देख गांधीजी भी सोचते होंगे कि हे राम!…ये क्या हो रहा है..?

रामपुरा स्थित महात्मा गांधी स्कूल का नाम आज भले ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हो, लेकिन पहले इसे कर्जन वायली मेमोरियल हॉल के नाम से जाना जाता था। इतिहासविद् फिरोज अहमद बताते हैं कि कोटा के पॉलिटिकल एजेंट रहे कर्जन वायली के नाम से महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने इस इमारत का निर्माण करवाया था।

गांधीजी का निधन हुआ तो उनकी अस्थियों को देश में कई जगहों पर नदियों में विसर्जित किया गया। कोटा में भी उनका अस्थि कलश लेकर आए थे। इस अस्थि कलश को कर्जन वायली मेमोरियल हॉल में रखा गया था, तब से ही इसका नाम महात्मा गांधी भवन कर दिया गया।

चंबल में की गई थी अस्थियां विसर्जित

महात्मा गांधी स्कूल से कुछ दूरी पर छोटी समाध है। यहीं पर चंबल घाट पर 1 फरवरी 1948 को गांधीजी की अस्थियों को नाव से विसर्जित किया गया था। इस कार्यक्रम में कोटा के महाराव भीम सिंह द्वितीय समेत अन्य लोग शामिल हुए थे। नगर पालिका कोटा के चेयरमैन शंभू दयाल सक्सेना ने छोटी समाध की दीवार पर शिलालेख स्थापित किया था। अस्थि विसर्जन के दौरान सेना ने विमान से पुष्प वर्षा की थी।

गांधीजी का यह स्मारक वर्तमान में अनदेखी का शिकार है। चंबल के तट पर रिवर फ्रंंट बनाया गया, लेकिन इस क्षेत्र को रिवर फ्रंट से अलग ही रखा गया। हालात यह है कि यहां घाट और रास्ते पर गंदगी हो रही है। लोगों का कहना है कि रिवर फ्रंट के साथ इस स्थान का विकास होता तो पर्यटकों के लिए विशेष हो सकता था।

अतिक्रमण से घिरा प्रतिमा स्थल

अस्थि विसर्जन के बाद शहरवासियों के मन में गांधीजी की स्मृतियों को तरोताजा रखने के लिए नगर पालिका ने प्रस्ताव रखा था कि किसी उपयुक्त स्थान पर गांधीजी की प्रतिमा लगाकर उस स्थान का नाम गांधी चौक रखा जाए। प्रस्ताव पर मुहर लगी और 1950 में रामपुरा क्षेत्र में गांधीजी की प्रतिमा की स्थापना की गई। इस जगह का नाम गांधी चौक कर दिया गया।

यहां लगे शिलापट्ट के अनुसार कोटा के महाराव भीम सिंह बहादुर ने उद्घाटन किया था। चौक व प्रतिमा आज भी है, लेकिन अब यह स्थल अतिक्रमण से घिरा हुआ है। प्रतिमा के आस पास क्षेत्र में गंदगी, कीचड़ है। हालांकि खास मौकों पर ही गांधीजी को याद करते हैं, बाकी दिनों में यहां किसी का ध्यान नहीं।


जब रिवरफ्रंट बना था, तब इस तरफ ध्यान देना चाहिए था। यह स्थान रिवर फ्रंट से बिल्कुल अलग-थलग है। अब भी इस दिशा में ध्यान दिया जाए तो पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ यह स्थान बच्चों के लिए प्रेरणादायक बन सकता है। गांधी चौक की सि्थति को सुधारने के प्रयास किए हैं। लोकसभा अध्यक्ष को भी इससे अवगत करवाया है, उन्होंने स्वरूप निखारने के प्रति आश्वस्त किया है।

  • पंकज मेहता, गांधीवादी चिंतक

जब चंबल रिवर फ्रंट बनाया गया था तब घाट टॉस्क में शामिल नहीं था। अब उच्च अधिकारियों से कोई दिशा निर्देश मिलते हैं तो विकास करेंगे।
-मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण