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राजस्थान के दो मंत्रियों में ठनी, बोले सीएम से ​शिकायत करूंगा

ऊर्जा मंत्री नागर के निशाने पर ​​शिक्षा मंत्री मदन दिलावर है। दोनों मंत्रियों में कई मुद्दों को लेकर ठनी हुई है।

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कोटा में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर बैठक लेते हुए

KOTA NEWS. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मंगलवार को इंद्र विहार स्थित आवास पर स्कूल शिक्षा, समसा, पीडब्ल्यूडी और पंचायत समिति से जुड़े विभिन्न अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान मंत्री नागर ने स्कूलों में होने वाली लीकेज, सीपेज के साथ ही छत से पानी टपकने की समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने आपदा राहत के तहत अतिवृष्टि में जर्जर हुए स्कूलों के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। वहीं पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स को कार्य की व्यापक मॉनिटरिंग के लिए भी कहा।

स्कूलों के घटिया निर्माण पर फिर तल्खी दिखाई

बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि समसा के भरोसे स्कूलों का मरम्मत कार्य नहीं हो सकता है। मॉनिटरिंग नहीं होने से घटिया काम होते रहे हैं। जिले में 1100 स्कूलों मॉनिटरिंग का जिम्मा केवल तीन अभियंताओं के पास है। समसा की जगह पीडब्यूडी को जिम्मा सौंपने के संबंध में मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे। बैठक में स्कूलों के घटिया निर्माण पर फिर तल्खी दिखाई। ऊर्जा मंत्री नागर के निशाने पर ​​शिक्षा मंत्री मदन दिलावर है। दोनों मंत्रियों में कई मुद्दों को लेकर ठनी हुई है।

समाधान के दिए निर्देश

मंत्री नागर ने अधिकारियों से कहा कि स्कूल की छत पर वॉटरप्यूरीफायर का काम अलग एजेंसी को दिया जाए। स्कूलों में छत टपकने और पानी भरने की समस्या का समाधान बरसात से पूर्व ही होना चाहिए। वहीं छतों की सफाई के लिए पोर्टेबल सीढ़ी की भी व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे छत में पानी ना भरे। बैठक में पंचायत समिति सुल्तानपुर की बीडीओ भानुमौली मौर्य, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन अंकित बिंदल, दिनेश धाकड़, एडीपीसी आदित्य विजय, सीबीइओ सांगोद, सीबीईओ सुल्तानपुर समेत समसा के एईएन और जेईएन मौजूद रहे।

चीफ सेक्रेटरी से कहा, उचित मॉनिटरिंग की व्यवस्था करें

ऊर्जा मंत्री ने सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान समसा के अधिकारियों ने कहा कि स्कूलों में सिविल वर्क की मॉनिटरिंग करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। नागर ने चीफ सेक्रेटरी से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि कोटा में 1100 स्कूलों पर समसा में एक एईएन और दो जेईएन काम कर रहे हैं। ऐसे में, सभी स्कूलों में चल रहे करोड़ों रुपए के सिविल वर्क की मॉनिटरिंग प्रभावी तरीके से करना संभव नहीं है। जिससे स्कूलों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में होने वाले निर्माण कार्य की गुणवत्ता को जांचने के लिए स्थायी और उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मंत्री नागर ने बताया कि समसा में इंजीनियर्स की नियुक्ति के लिए पूर्व में शिक्षा मंत्री से भी आग्रह किया था। वहीं मुख्यमंत्री से भी चर्चा कर मॉनिटरिंग की उचित व्यवस्था की जाएगी।

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