
Parenting Tips For Gen Z Gen Alpha Kids|फोटो सोर्स – bharti.laughterqueen/Instgaram
Parenting Tips: आज की नई जनरेशन यानी Gen Z और Gen Alpha बच्चों की परवरिश पुराने तरीकों से काफी अलग हो चुकी है। मोबाइल, स्क्रीन टाइम और जंक फूड के बढ़ते चलन के बीच बच्चों को हेल्दी आदतें सिखाना पैरेंट्स के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। Filmy Beat को दिए एक इंटरव्यू में कॉमेडियन भारती सिंह ने इसी मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि वह अपने बेटे को जंक फूड से दूर रखने के लिए क्या-क्या करती हैं। उन्होंने नए पैरेंट्स के लिए आसान और प्रैक्टिकल पैरेंटिंग टिप्स भी शेयर कीं, जो बच्चों की सेहत और आदतों दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
भारती सिंह का मानना है कि बच्चों को स्कूल के टिफिन में शुरुआत से ही घर का बना सादा खाना मिलना चाहिए।उनके मुताबिक आजकल कई माता-पिता बच्चों के लंचबॉक्स में कपकेक, पास्ता या नूडल्स भेज देते हैं, जबकि पराठा, सब्ज़ी, फल और ड्राई फ्रूट्स बच्चों की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं।घर का बना खाना न सिर्फ पौष्टिक होता है, बल्कि बच्चों को कम उम्र से ही संतुलित खान-पान की आदत भी सिखाता है।
भारती का यह कहना कि Gen Z और Gen Alpha बच्चे आगे चलकर जंक फूड खा ही लेंगे, एक हकीकत को दिखाता है।उनका मानना है कि बचपन में अगर बच्चों को सही खाना मिल जाए, तो वे बड़े होकर भी खाने को लेकर समझदारी दिखाते हैं।शुरुआती सालों में बनाई गई आदतें बच्चों की पूरी जिंदगी पर असर डालती हैं।
भारती खुद को “एवोकाडो और मैश्ड पोटैटो वाली मम्मी” नहीं मानतीं।उनके घर में आज भी दाल-चावल, आलू की सब्जी, अचार और चटनी जैसी चीजें बनती हैं और वही उनका बच्चा खाता है।उनका मानना है कि देसी खाना बच्चों को जमीन से जोड़ता है और शरीर को मजबूत बनाता है।
भारती अपने बेटे के साथ वही खाना खाती हैं, जो वह खुद खाती हैं।यह आदत बच्चों में खाने के प्रति भरोसा और अपनापन पैदा करती है।जब बच्चे माता-पिता को वही खाना खाते देखते हैं, तो वे नखरे कम करते हैं और खाना आसानी से स्वीकार करते हैं।
भारती ने बताया कि उनके बेटे ने अब तक ब्रेड नहीं खाई है।उनके अनुसार प्रोसेस्ड फूड जितना देर से बच्चों की जिंदगी में आए, उतना अच्छा है।हालांकि वह यह भी मानती हैं कि हर चीज़ से बच्चों को हमेशा दूर रखना संभव नहीं, लेकिन शुरुआत सही होनी चाहिए।
भारती सिर्फ अच्छा खाना ही नहीं, बल्कि खाने की इज्जत करना भी सिखाती हैं।वह बचा हुआ खाना फेंकने के बजाय पैक करवाकर घर ले जाती हैं और इसे गलत नहीं मानतीं।यह आदत बच्चों को सिखाती है कि खाना मेहनत और प्यार से बनता है।
डाइटिशियन( शोधकर्ता )पल्लवी कुमारी के अनुसार, घर का बना भारतीय खाना बच्चों के लिए फायदेमंद है, लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है।ज्यादा घी-तेल, प्रोटीन की कमी या कुछ पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए खाने में विविधता होनी चाहिए।
Published on:
06 Feb 2026 01:13 pm
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