
Natural vitamin C source|फोटो सोर्स – Freepik
Ambada Benefits: छोटा सा दिखने वाला आमड़ा भले ही स्वाद में खट्टा हो, लेकिन सेहत के मामले में यह किसी सुपरफूड से कम नहीं है।इसे वैज्ञानिक रूप से Spondias pinnata कहा जाता है और यह भारत के कई हिस्सों में पारंपरिक रूप से खाया जाता रहा है। विटामिन C से भरपूर आमड़ा इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर पाचन सुधारने तक कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाता है। आइए जानते हैं कि क्यों आमड़ा को कहा जाता है सेहत का पावरहाउस और रोजमर्रा की डाइट में यह कैसे सुपरहिट साबित हो सकता है।
आमड़ा को विटामिन C का बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। आंवले के बाद यह विटामिन C से भरपूर फलों में गिना जाता है। बदलते मौसम में जब इम्युनिटी कमजोर पड़ने लगती है, तब आमड़ा शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।
आमड़ा में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसका सेवन करने से कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। साथ ही यह शरीर से जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिससे पेट हल्का और शरीर चुस्त रहता है।
विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आमड़ा त्वचा को अंदर से पोषण देता है। यह त्वचा में निखार लाने और समय से पहले होने वाली झुर्रियों को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें मौजूद आयरन और कैल्शियम शरीर को मजबूती देते हैं और थकान को दूर रखने में सहायक होते हैं।
आमड़ा में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में भी सहयोग मिल सकता है।
आयुर्वेद में आमड़ा को औषधीय फल माना गया है। इसके फल, पत्तियां, छाल और बीज सभी का उपयोग अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, आमड़ा भूख बढ़ाने, पाचन सुधारने, त्वचा रोगों में राहत देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में उपयोगी है।
भारतीय रसोई में आमड़ा का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। आमड़ा की चटनी और अचार खास तौर पर बहुत पसंद किए जाते हैं। बिहार और पूर्वी भारत के कई राज्यों में यह फल ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा है, जहां यह प्राकृतिक रूप से उगने वाले पेड़ों पर आसानी से मिल जाता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
06 Feb 2026 12:17 pm
Published on:
06 Feb 2026 12:14 pm
