
Ready to eat food danger|फोटो सोर्स – Freepik
Ultra Processed Foods Alert: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मैगी जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेटबंद फूड लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। स्वाद और सहूलियत के पीछे छुपा सच यह है कि इन फूड्स में मौजूद ज्यादा नमक, रिफाइंड कार्ब्स, प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर शरीर पर धीरे-धीरे असर डालते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स और कई रिसर्च रिपोर्ट्स चेतावनी दे रही हैं कि इनका लगातार सेवन मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा सकता है।
मध्य प्रदेश के हरदा जिले से सामने आया मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की खबर नहीं है, बल्कि हमारी रोजमर्रा की खानपान की आदतों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आरोप है कि मैगी खाने के बाद 25 वर्षीय युवक अरविंद झिझोरे की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, इसलिए मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं है। लेकिन इस घटना ने पैकेटबंद और इंस्टेंट फूड को लेकर लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
मैगी, चिप्स, बिस्किट, पैकेटबंद केक, मीठे अनाज, फ्रिज़ी ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट मील ये सभी Ultra-Processed Foods की श्रेणी में आते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, ऐसे खाद्य पदार्थ कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। इनमें रंग, फ्लेवर, इमल्सीफायर और प्रिजरवेटिव्स मिलाए जाते हैं ताकि स्वाद बढ़े और चीजें लंबे समय तक खराब न हों।समस्या यह है कि इनमें फाइबर, विटामिन और जरूरी पोषक तत्व बहुत कम होते हैं, जबकि नमक, चीनी और अस्वस्थ वसा की मात्रा जरूरत से कहीं ज्यादा होती है।
शोध बताते हैं कि अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन शरीर पर धीरे-धीरे बुरा असर डालता है। इससे मोटापे का खतरा लगभग 55% तक बढ़ सकता है। नींद से जुड़ी समस्याओं का जोखिम 41%, टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 40% और अवसाद का खतरा करीब 20% तक बढ़ने की बात सामने आई है।यही वजह है कि डॉक्टर इन्हें “साइलेंट किलर” कहने लगे हैं जो तुरंत नहीं, लेकिन समय के साथ शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं।
कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि Ultra-Processed Foods का अस्थमा, पाचन तंत्र और कुछ हृदय संबंधी जोखिमों से सीमित संबंध है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये सुरक्षित हैं। लगातार सेवन करने पर ये मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं।
इन खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाना शायद हर किसी के लिए आसान न हो, लेकिन संतुलन बेहद जरूरी है। घर का ताजा, सादा और मौसमी खाना प्राथमिकता बनाएं। पैकेट पर लिखे पोषण लेबल को पढ़ने की आदत डालें। बच्चों को शुरुआत से ही हेल्दी फूड की आदत सिखाएं और इंस्टेंट फूड को कभी-कभार तक सीमित रखें।
Published on:
08 Feb 2026 01:01 pm
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