
Women Workforce Participation|फोटो सोर्स – Freepik
Working Women in India: भारत में युवा महिलाओं की सोच तेजी से बदल रही है। अब पढ़ाई पूरी होते ही शादी को प्राथमिकता देने की जगह, करियर और आत्मनिर्भरता को ज्यादा अहम माना जा रहा है। हाल ही में यूनिसेफ द्वारा जारी एक सर्वे इसी बदलते नजरिये की ओर इशारा करता है, जिसमें साफ तौर पर दिखता है कि आज की युवा पीढ़ी महिलाओं को कामकाजी भूमिकाओं में आगे बढ़ते देखना चाहती है।यूनिसेफ के युवा मंच युवाह और यू-रिपोर्ट के जरिए किए गए इस सर्वे में देशभर के 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 24 हजार से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया। सर्वे का उद्देश्य यह समझना था कि युवा वर्ग महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी और गैर-पारंपरिक नौकरियों को लेकर क्या सोचता है।
सर्वे के नतीजे काफी अहम हैं। लगभग 75 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि महिलाओं के लिए पढ़ाई के बाद सबसे जरूरी कदम नौकरी हासिल करना होना चाहिए, न कि तुरंत शादी। यह सोच न सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है।
इस सर्वे पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव आरती आहूजा ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है, तो महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
यूनिसेफ इंडिया में युवाह की प्रमुख धुवाराखा श्रीराम ने कहा कि लैंगिक समानता सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ ‘सक्षम नारी का सफर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के लिए अवसरों तक पहुंच को आसान बनाना और ऐसा समाज तैयार करना है, जहां महिलाएं केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाली भूमिका में भी हों।
यह सर्वे इस बात का संकेत है कि भारत की युवा पीढ़ी परंपरागत सोच से आगे बढ़ रही है। आज की महिलाएं अपने फैसले खुद लेना चाहती हैं चाहे वह करियर का चुनाव हो या जीवन की दिशा। यह बदलाव न सिर्फ महिलाओं के लिए, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
Published on:
03 Feb 2026 05:00 pm
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