
चाउमीन को लेकर हंगामा, छात्रों का दो दिन के लिए निलंबन (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
School Controversy Lucknow: लखनऊ के प्रतिष्ठित सेंट मैरी स्कूल में आयोजित फेयरवेल पार्टी के दौरान अनुशासनहीनता का एक मामला सामने आया है, जिसने छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच चर्चा छेड़ दी है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान फूड काउंटर पर चाउमीन लेने को लेकर कुछ छात्रों ने अव्यवस्था फैला दी, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने संबंधित छात्रों को दो दिनों के लिए स्कूल आने से रोकने (सस्पेंड करने) का निर्णय लिया। इस कार्रवाई के बाद जहां स्कूल प्रबंधन अनुशासन को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, वहीं अभिभावक इस फैसले को कठोर बताते हुए नाराजगी जता रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, स्कूल में फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमें कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम में भोजन की भी व्यवस्था की गई थी। स्कूल प्रशासन के मुताबिक पहले कक्षा 10 के छात्रों को व्यवस्थित रूप से भोजन कराया गया। इसके बाद जब कक्षा 9 के छात्र फूड स्टॉल की ओर पहुंचे तो वहां अचानक भीड़ बढ़ गई। आरोप है कि कुछ छात्र बार-बार चाउमीन लेने लगे और लाइन व्यवस्था टूट गई। स्थिति ऐसी बन गई कि वहां मौजूद कर्मचारी घबरा गया और कुछ समय के लिए काउंटर से हट गया। इसी घटना को स्कूल प्रबंधन ने गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की।
स्कूल की प्रिंसिपल पूनम नायर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम सोच-समझकर उठाया गया है। उन्होंने कहा कि फेयरवेल पार्टी के दौरान कुछ छात्रों ने अनुशासनहीन व्यवहार किया। फूड स्टॉल पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई थी। इस तरह का व्यवहार स्कूल की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसलिए संबंधित छात्रों को दो दिन के लिए निलंबित किया गया है। इसके बाद वे नियमित रूप से स्कूल आ सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अपने लगभग 25 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने पहली बार इस तरह की घटना देखी है। उनके अनुसार स्कूल में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्कूल की एक शिक्षिका अर्चना ने बताया कि घटना फेयरवेल कार्यक्रम के दिन हुई थी, लेकिन विस्तृत जानकारी प्रिंसिपल ही दे सकती हैं। वहीं कक्षा 9 के क्लास टीचर अखिलेश यादव इस पूरे मामले से अवगत हैं। हालांकि शिक्षकों ने आधिकारिक बयान देने से परहेज किया, जिससे यह स्पष्ट है कि स्कूल प्रबंधन इस मुद्दे को संवेदनशीलता से संभालना चाहता है।
घटना के बाद छात्रों के अभिभावकों में असंतोष देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि फेयरवेल जैसे कार्यक्रमों में बच्चों में उत्साह स्वाभाविक होता है। यदि किसी छात्र ने शरारत की भी, तो उसे समझाकर या चेतावनी देकर भी सुधारा जा सकता था।
एक अभिभावक ने कहा कि बच्चे उत्साहित थे, हो सकता है लाइन में धक्का-मुक्की हुई हो, लेकिन दो दिन का सस्पेंशन देना बहुत सख्त कदम है। इससे बच्चों के मन पर गलत असर पड़ सकता है। अभिभावकों का यह भी कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों में डर का माहौल बनता है, जबकि स्कूल को सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में अनुशासन आवश्यक है, लेकिन साथ ही किशोर छात्रों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को भी समझना जरूरी है। किशोरावस्था में उत्साह और आवेग अधिक होता है। सामूहिक कार्यक्रमों में भीड़ नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दंडात्मक कार्रवाई के साथ परामर्श भी जरूरी। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में काउंसलिंग, अभिभावक बैठक और चेतावनी जैसे विकल्प भी प्रभावी हो सकते हैं।
बड़े स्कूल आयोजनों में भोजन वितरण के दौरान अव्यवस्था की स्थिति बनना असामान्य नहीं है। भीड़, उत्साह और सीमित समय के कारण छात्र कभी-कभी संयम खो बैठते हैं। ऐसे आयोजनों में आम तौर पर,अलग-अलग कक्षाओं के लिए समय निर्धारित किया जाता है,शिक्षकों की निगरानी रखी जाती है,छात्रों को पहले से निर्देश दिए जाते हैं। फिर भी, यदि व्यवस्थाएं पूरी तरह सुदृढ़ न हों तो स्थिति बिगड़ सकती है। दो दिन का निलंबन भले ही अस्थायी हो, लेकिन छात्रों के आत्मसम्मान और मानसिक स्थिति पर असर डाल सकता है। स्कूल काउंसलरों का मानना है कि इस दौरान बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि यह दंड नहीं, बल्कि अनुशासन सीखने का अवसर है।
Published on:
04 Feb 2026 03:51 pm
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