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UP Government Action: यूपी सरकार सख्त, नियम न मानने वाले कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई

UP Government Manav Sampada Portal: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 68,236 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। इन कर्मचारियों ने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवरण दर्ज किए बिना वेतन जारी नहीं होगा।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 02, 2026

संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया तो रुकी सैलरी! यूपी सरकार ने 68,236 कर्मचारियों पर लगाया वेतन रोकने का बड़ा कदम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया तो रुकी सैलरी! यूपी सरकार ने 68,236 कर्मचारियों पर लगाया वेतन रोकने का बड़ा कदम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Government Freezes Salaries : उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान को और निर्णायक रूप देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य में 68,236 सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है, क्योंकि उन्होंने निर्धारित समय सीमा तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि जब तक हर कर्मचारी आवश्यक संपत्ति विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं करेगा, उसका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। यह फैसला योगी आदित्यनाथ की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की कोशिश है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष ही आदेश जारी किया था कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों, प्रथम श्रेणी अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक को मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल तथा अचल संपत्ति का विवरण अपडेट करना अनिवार्य है। इसके पीछे सरकार का लक्ष्य प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना, अवैध संपत्ति निर्माण पर रोक लगाना तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया। आदेश के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक यह विवरण दर्ज करना था। हालांकि, इस समय सीमा के अंत तक 68,236 कर्मचारियों ने पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा अपलोड नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने उनके जनवरी महीने का वेतन रोकने का निर्णय लिया।

वेतन रोकने की प्रक्रिया और उसका दायरा

इस कार्रवाई के तहत राज्य के कुल 8,66,261 सरकारी कर्मचारियों में से 68,236 लोगों का वेतन रोका गया। इनमें से सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के, 22,624 चतुर्थ श्रेणी के, 7,204 द्वितीय श्रेणी के और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि उच्च तथा निम्न दोनों स्तर के कर्मचारियों ने निर्देश का पालन नहीं किया।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ वेतन रोकने का कदम ही अंतिम कार्रवाई नहीं है। यदि आवश्यक संपत्ति विवरण समय रहते नहीं डाला जाता है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है, जिसमें सेवा-सम्बंधित प्रतिबंध और विभागीय जांच शामिल हो सकते हैं।

भ्रष्टाचार पर जीरो-टॉलरेंस नीति का अमल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भ्रष्टाचार-रोधी नीति को गंभीरता से लागू कर रही है। यह कदम सरकारी मशीनरी में पारदर्शिता लाई जा सके और किसी भी अव्यवस्था या संपत्ति-असमानता की आशंका को कम किया जा सके, इसका प्रयास है। सरकार का मानना है कि जब कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का खुलासा करना अनिवार्य होगा, तो अन्यायपूर्ण संपत्ति संग्रहण और बेनामी लेनदेन जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। राज्य के विभिन्न विभाग जैसे लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा समाज कल्याण से जुड़े कर्मचारियों ने भी निर्देश का पालन नहीं किया जिससे यह मामला और अधिक व्यापक रूप ले लिया है।

अलग-अलग विभागों की प्रतिक्रिया

सरकार द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देश में स्पष्ट कहा गया था कि हर विभाग के Drawing and Disbursing Officers (DDOs) तथा नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि संपत्ति विवरण समय पर अपलोड हो।  कई विभागों में अनुपालन की दर अपेक्षाकृत कम रही और सरकार ने इसकी पूर्ण जिम्मेदारी विभागों पर डाली। दफ्तरों में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें हुईं और कर्मचारी प्रतिनिधियों से भी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।  लोक निर्माण, राजस्व, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता, आबकारी, खाद्य एवं रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन और परिवहन विभाग से विभागों से जुड़े हुए हैं,संकेत भी मिले हैं कि सरकार विभागीय प्रमुखों को जवाबदेह बनाकर यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। 

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं हो पाया। कुछ कर्मचारियों ने प्रशासन से और समय देने की मांग भी की, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनके पास विस्तृत चल-अचल संपत्ति है और जिनका विवरण तकनीकी रूप से अपलोड करने में कठिनाई हुई। हालांकि सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई औपचारिक तारीख बढ़ोतरी का संकेत नहीं दिया है। कई कर्मचारियों का यह भी कहना है कि वेतन रोकने का निर्णय उनके घरेलू खर्च और परिवार की जरूरतों पर भारी प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर उन कर्मचारियों के लिए जिनके पास अन्य आर्थिक विकल्प सीमित हैं।