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UP Health Department: पांच दिन बाद फैसला: डॉ पवन कुमार अरुण बने डीजी हेल्थ, स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

UP Health Administration: पांच दिनों के मंथन के बाद प्रदेश को नया महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य मिल गया है। सरकार ने डॉ पवन कुमार अरुण को यह जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में अन्य शीर्ष पदों पर भी फेरबदल करते हुए डॉ हरी दास अग्रवाल और डॉ रंजना खरे को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 06, 2026

पांच दिन के मंथन के बाद प्रदेश को मिला नया डीजी हेल्थ (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

पांच दिन के मंथन के बाद प्रदेश को मिला नया डीजी हेल्थ (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Health Department New DG Dr Pawan Kumar Arun: प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा अहम प्रशासनिक फैसला आखिरकार सामने आ गया। पांच दिनों के विचार-मंथन और उच्चस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार ने डॉ. पवन कुमार अरुण को महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य नियुक्त कर दिया है। गुरुवार को जारी शासनादेश में इस बहुप्रतीक्षित नियुक्ति की औपचारिक घोषणा की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष स्तर पर अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव किए गए हैं, जिससे विभागीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में सरकार का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की कमान संभालने वाले इस पद पर नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि बीते माह 31 जनवरी को तत्कालीन महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. आर.पी.एस. सुमन सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त था और विभागीय कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए स्थायी नियुक्ति की प्रतीक्षा की जा रही थी।

स्वास्थ्य विभाग में शीर्ष स्तर पर फेरबदल

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार केवल डीजी हेल्थ की नियुक्ति ही नहीं हुई, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अन्य प्रमुख निदेशालयों में भी जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है।

  • डॉ. हरी दास अग्रवाल को महानिदेशक, परिवार कल्याण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • डॉ. रंजना खरे को महानिदेशक, प्रशिक्षण के पद का कार्यभार दिया गया है।

इन नियुक्तियों से स्पष्ट है कि सरकार ने विभाग के विभिन्न अनुभवी अधिकारियों को उनकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और व्यवस्थागत क्षमता में सुधार लाया जा सके।

डॉ. पवन कुमार अरुण: अनुभव और प्रशासनिक पकड़

नवनियुक्त महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. पवन कुमार अरुण स्वास्थ्य विभाग में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पहले महानिदेशक, परिवार कल्याण की जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसके अतिरिक्त वे महानिदेशक प्रशिक्षण और बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं।

उनके प्रशासनिक कार्यकाल में संस्थागत प्रबंधन, चिकित्सा सेवाओं की निगरानी, प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका रही है। यही कारण है कि सरकार ने उनके अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें राज्य की समूची चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की कमान सौंपी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बहुत व्यापक है,जिसमें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य इकाइयाँ और विशेष चिकित्सा सेवाएँ शामिल हैं। ऐसे में इस पद पर ऐसे अधिकारी की आवश्यकता होती है जो प्रशासनिक और चिकित्सा दोनों पक्षों को संतुलित ढंग से संभाल सके।

परिवार कल्याण निदेशालय की जिम्मेदारी डॉ. अग्रवाल को

डॉ. पवन कुमार अरुण के स्थान पर डॉ. हरी दास अग्रवाल को महानिदेशक, परिवार कल्याण बनाया गया है। परिवार कल्याण निदेशालय राज्य की जनसंख्या स्थिरीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कार्यक्रमों और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. अग्रवाल को इस क्षेत्र में लंबे अनुभव का लाभ माना जा रहा है। शासन स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में परिवार कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग और परिणाम आधारित क्रियान्वयन को गति मिलेगी।

प्रशिक्षण निदेशालय की कमान डॉ. रंजना खरे को

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता काफी हद तक चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण पर निर्भर करती है। इसी दृष्टि से डॉ. रंजना खरे को महानिदेशक, प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशिक्षण निदेशालय डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और स्वास्थ्य अधिकारियों के क्षमता विकास कार्यक्रमों को संचालित करता है। डॉ. खरे की नियुक्ति को इस रूप में भी देखा जा रहा है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानव संसाधन की दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

सेवानिवृत्ति के बाद पांच दिन तक चला मंथन

31 जनवरी को डॉ. आर.पी.एस. सुमन के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। उच्चस्तरीय प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श के बाद पांच दिनों में यह निर्णय लिया गया। यह अवधि बताती है कि सरकार ने इस पद के महत्व को देखते हुए सावधानीपूर्वक चयन प्रक्रिया अपनाई। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि नियुक्त अधिकारी प्रशासनिक अनुभव, विभागीय समझ और नेतृत्व क्षमता-तीनों मानकों पर खरा उतरता हो।

राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम समय

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, नई योजनाओं के क्रियान्वयन, अस्पतालों के उन्नयन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड व्यवस्था, आपात चिकित्सा सेवाओं और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने जैसे कई लक्ष्य सामने हैं। ऐसे समय में स्थायी डीजी हेल्थ की नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, दवा उपलब्धता, चिकित्सकों की तैनाती और आधारभूत संरचना की निगरानी अब सीधे नवनियुक्त महानिदेशक की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।