
नई सोलर नीति से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मिला नया बल, राष्ट्रीय फलक पर नई पहचान के साथ उभरा प्रदेश (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Green UP: उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस और दूरदर्शी नीतियाँ लागू की हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को होटल सेंट्रम, लखनऊ में एसोचैम (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित 5वें ग्रीन एनर्जी एंड सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मंत्री नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज ग्रीन एनर्जी प्रमोशन और पर्यावरण-संतुलित औद्योगिक विकास की दिशा में निरंतर और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार नई सोलर नीति के माध्यम से निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा का पूरा इकोसिस्टम सशक्त हो रहा है। सरकार निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में औद्योगिक विकास का इको-फ्रेंडली होना समय की अनिवार्य आवश्यकता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष स्थान दिया है। उत्तर प्रदेश अब केवल औद्योगिक विकास ही नहीं, बल्कि सतत और संतुलित विकास का भी मॉडल बनकर उभर रहा है।
मंत्री नन्दी ने प्रदेश की नई सोलर नीति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। सोलर प्लांट की स्थापना के लिए स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट दी गई है, वहीं दस वर्षों तक 100 प्रतिशत विद्युत शुल्क माफ करने की व्यवस्था की गई है। इन प्रोत्साहनों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं और सरकार इन संभावनाओं को अवसर में बदलने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रही है। आने वाले वर्षों में प्रदेश ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
मंत्री नन्दी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय फलक पर नई पहचान और नए परसेप्शन के साथ उभरा है। इसके पीछे डबल इंजन सरकार का सक्षम नेतृत्व, सटीक निर्णय लेने की क्षमता, दूरदर्शी दृष्टिकोण, प्रभावी नीतियाँ और स्पष्ट नीयत है। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को लेकर जो नकारात्मक धारणाएँ थीं, वे अब तेजी से बदल रही हैं और प्रदेश निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनता जा रहा है।
उन्होंने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति को याद करते हुए कहा कि उस समय सपा, बसपा और कांग्रेस की सरकारों में परिवारवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार और माफिया राज ने प्रदेश की प्रगति पर ब्रेक लगा दिया था। न निवेश था, न उद्योगों का विस्तार और निर्यात की स्थिति भी बेहद कमजोर थी।
मंत्री नंदी ने कहा, “आज संसाधन वही हैं, स्रोत वही हैं और व्यवस्थाए भी वही हैं, लेकिन केवल सरकार की प्रतिबद्धता बदलने से पूरे प्रदेश का परिवेश बदल गया है। पहले की सरकारों की प्रतिबद्धता निजी और पारिवारिक स्वार्थ तक सीमित थी, जबकि हमारी प्रतिबद्धता प्रदेश के 25 करोड़ नागरिकों की समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी है।”
औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश निवेश और औद्योगिक विकास की दिशा में एक मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (GIS) जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की अपार सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार अब रुकने वाली नहीं है।
उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के बाद आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में माननीय प्रधानमंत्री के कर-कमलों से लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की औद्योगिक प्रगति केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविकता के ठोस धरातल पर आधारित है।
मंत्री नन्दी ने आगे कहा कि बहुत जल्द ही लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग होने जा रही है। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत निगरानी में ये सभी परियोजनाएं तैयारी के अंतिम चरण में हैं। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।
कॉन्क्लेव में उपस्थित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए मंत्री नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा विकास सुनिश्चित करना है जो पर्यावरण के अनुकूल हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का निर्माण करे। ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में उठाए जा रहे कदम इसी सोच का परिणाम हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग, सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों से उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छुएगा और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत योगदान देगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों के माध्यम से ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, क्लीन टेक्नोलॉजी और निवेश संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्योगपति, निवेशक, नीति विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, यह कॉन्क्लेव उत्तर प्रदेश की ग्रीन एनर्जी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने प्रदेश के उज्ज्वल, स्वच्छ और समृद्ध भविष्य की तस्वीर को और स्पष्ट किया।
Published on:
17 Jan 2026 10:36 am
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