
कोहरे में बढ़ोतरी, शीतलहर से राहत लेकिन शीत दिवस की संभावना (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Western Disturbance to Ease Cold Wave but Intensify Fog: उत्तर प्रदेश में बीते कई दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच अब मौसम का मिज़ाज धीरे-धीरे बदलने के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से प्रदेश के न्यूनतम तापमान में आगामी दिनों में क्रमिक बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की संभावना है। हालांकि, इस बढ़ोतरी के साथ ही प्रदेश भर में कोहरे का दायरा और घनत्व बढ़ने से शीत दिवस (Cold Day) की परिस्थितियां बनने की चेतावनी भी मौसम विभाग ने जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रात के तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही थी, जिससे शीतलहर का प्रभाव और अधिक तीव्र हो गया था। अब पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इस गिरावट पर विराम लगने के साथ न्यूनतम तापमान में आंशिक बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से रात के समय जारी शीतलहर की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे कानपुर, बाराबंकी और अयोध्या में बीती रात आंशिक शीतलहर की स्थिति दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके असर से अगले 4 से 5 दिनों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में लगभग 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक बढ़ोतरी होने की संभावना है।
हालांकि तापमान में आंशिक बढ़ोतरी से रात की शीतलहर में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन इसके साथ ही कोहरे की समस्या और गंभीर होने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 2 से 3 दिनों के दौरान पूरे प्रदेश में कोहरे का क्षेत्रफल और घनत्व बढ़ेगा। विशेष रूप से तराई क्षेत्रों, उत्तरी और मध्यवर्ती उत्तर प्रदेश में सुबह के समय घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति बन सकती है। राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में आज सुबह शीत दिवस की परिस्थितियां देखी गईं, जहां दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, घने कोहरे के कारण सूर्य की किरणें धरातल तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे दिन के तापमान में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाती। इसी वजह से दिन के समय भी ठंड बनी रहती है और शीत दिवस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आगामी दिनों में दिन के तापमान में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुछ इलाकों में दिन चढ़ने के बाद कोहरा देर से छंटेगा, जिससे धूप देर से निकलेगी और सुबह से दोपहर तक ठंड का असर बना रहेगा। हालांकि दोपहर बाद कुछ समय के लिए मौसम खुशगवार रहने की संभावना है, लेकिन शाम ढलते ही ठंड फिर से बढ़ जाएगी।
मौसम विभाग ने बताया है कि 18 जनवरी तक प्रदेश के लगभग सभी उत्तरी और मध्यवर्ती हिस्सों में घने कोहरे और शीत दिवस की परिस्थितियां बनी रह सकती हैं। खासकर तराई क्षेत्रों में सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रहने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। वाहन चालकों को सुबह और रात के समय अनावश्यक यात्रा से बचने, फॉग लाइट का उपयोग करने और धीमी गति से वाहन चलाने की हिदायत दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार 18 जनवरी के बाद धीरे-धीरे कोहरे में कमी आने लगेगी। इसके बाद एक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 22 जनवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। 23 जनवरी तक यह बारिश प्रदेश के संलग्न मध्यवर्ती हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। बारिश के बाद तापमान में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है और ठंड के असर में भी कमी आ सकती है।
मौसम के इस बदले मिज़ाज का सीधा असर किसानों और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। एक ओर जहां कोहरा और शीत दिवस रबी फसलों के लिए कुछ हद तक लाभकारी माने जा रहे हैं, वहीं अत्यधिक ठंड और नमी से सब्जियों और दलहनी फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सुबह-शाम ठंड अधिक रहने के कारण सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखें और आवश्यक एहतियात बरतें। गर्म कपड़ों का उपयोग, अलाव की व्यवस्था और खुले में लंबे समय तक रहने से बचाव करने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर प्रदेश में ठंड का स्वरूप बदल रहा है। जहां शीतलहर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं घने कोहरे और शीत दिवस आने वाले दिनों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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Published on:
17 Jan 2026 04:00 am
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