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समय पर इलाज और इलाज एंबुलेंस नहीं मिलने से बना रहता जान का जोखिम

Health services are collapsing ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। कहीं अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो कहीं जरूरी संसाधनों का अभाव है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब मरीज को समय पर इलाज या रेफ र करने की व्यवस्था नहीं मिल पाती। नतीजतन कई बार […]

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Health services are collapsing

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ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। कहीं अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो कहीं जरूरी संसाधनों का अभाव है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब मरीज को समय पर इलाज या रेफ र करने की व्यवस्था नहीं मिल पाती। नतीजतन कई बार मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ग्रामीण अस्पतालों की यह बदहाली स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
तहसील करेली अंतर्गत ग्राम पंचायत आमगांव बड़ा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र इसकी एक बानगी मात्र है। यहां लंबे समय से एंबुलेंस वाहन खराब हालत में खड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार उक्त एंबुलेंस वाहन को आरटीओ विभाग द्वारा ओवरएज होने के कारण रिटायर भी कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल नरसिंहपुर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करेली पहुंचाने के लिए कोई त्वरित साधन उपलब्ध नहीं है।हाल ही में इस समस्या की गंभीरता तब सामने आई। जब ग्राम नया खेड़ा से एक दो वर्षीय बच्चे को आमगांव बड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। बच्चे को लगातार झटके आ रहे थे। मौके पर मौजूद डॉक्टर जयराम पटेल ने जांच के बाद बताया कि बच्चे का इलाज यहां संभव नहीं है और उसे तुरंत करेली या नरसिंहपुर रेफ र करना होगा। डॉक्टर द्वारा एंबुलेंस को कॉल किया गया। लेकिन उसके पहुंचने में काफी देर लग गई। मजबूरी में परिजनों को बच्चे को निजी वाहन से ले जाना पड़ा। गनीमत रही कि समय रहते निजी साधन मिल गयाए अन्यथा परिणाम गंभीर हो सकते थे।आमगांव बड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र लगभग 40 गांवों की आबादी के लिए एकमात्र प्राथमिक उपचार का केंद्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद केंद्र पर एक कार्यशील एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं होना। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।


यहां खाली पड़े है विशेषज्ञों के पद


तेंदूखेड़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों की कमी और आवश्यक सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन स्वीकृत 23 पदों में से 9 पद अब भी रिक्त हैं। सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञ पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा नेत्र सहायक, लेखापाल, लैब सहायक, ड्रेसर, ओटी सहायक, वार्डबॉय और वाहन चालक जैसे जरूरी पदों की भी कमी है।अस्पताल में वर्तमान में पांच चिकित्सा अधिकारी, एक आयुष चिकित्सक, सात स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक रेडियोग्राफ र और एक फ ार्मासिस्ट के भरोसे सेवाएं संचालित की जा रही हैं।सीमित स्टाफ के कारण व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।12 बेड का आईसीयू वार्ड पिछले ढाई से तीन साल से शुरू नहीं हो सका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते यह वार्ड केवल भवन बनकर रह गया है। गंभीर मरीजों और दुर्घटनाग्रस्तों के इलाज में यह बड़ी बाधा साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि उपलब्ध स्टाफ आठ घंटे की जगह 24 घंटे सेवाएं देने को मजबूर है। पर्याप्त विशेषज्ञ और संसाधन न होने के कारण गंभीर मरीजों को समय पर उच्च संस्थानों में रेफर करने में भी परेशानी होती है, जिससे मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है।
यह हालात केवल आमगांव बड़ा या तेंदूखेड़ा तक सीमित नहीं हैं। जिले के कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में या तो डॉक्टरों की कमी है या फिर आवश्यक संसाधन नदारद हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब प्राथमिक स्तर पर ही व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैंख् तो ग्रामीण मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज कैसे मिल पाएगा। आवश्यकता है कि शासन और स्वास्थ्य विभाग जमीनी हकीकत को समझते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए ताकि अस्पतालों की चौखट पर इलाज के इंतजार में किसी की जान न जाए।


वर्जन


केंद्र पर लंबे समय से नई एंबुलेंस की सख्त आवश्यकता है, जिसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार दी जा चुकी है।
डॉक्टर जयराम पटेल प्रभारी आमगांव बड़ा स्वास्थ्य केंद्र