28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बतौर पार्टी अध्यक्ष शुरू होते ही खत्म हुआ अजित पवार का करियर, दादी के साथ भी हुआ था कुछ ऐसा

Maharashtra Deupty CM Ajit Pawar Passed Away: अजित पवार के बाद उनकी एनसीपी के भविष्य को लेकर भी कयास लाग्ने लगे हैं।

2 min read
Google source verification

अजित पवार का निधन। (फोटो- IANS)

Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Passed Away: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की जान एक विमान हादसे ने ले ली है। पवार राजनीति में काफी समय से थे, लेकिन एक पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनका करियर ज्यादा लंबा नहीं था। इस हादसे के साथ ही उनका यह सफर खत्म हो गया।

दादी भी राजनीति में थीं, एक हादसे ने रोक दिया सफर

महज संयोग है कि अजित पवार की दादी भी राजनीति में थीं और उनका राजनीतिक करियर भी एक दुर्घटना की वजह से खत्म हो गया था। हालांकि, वह हादसा जानलेवा नहीं था।

अजित पवार की दादी शारदाबाई गोविंदराव पवार थीं। वह राजनीति में सालों सक्रिय रहीं। जिस समय शरद पवार का जन्म हुआ था, उस समय पुणे लोकल बोर्ड की सदस्य थीं।

शरद पवार को गोद में लेकर ही बोर्ड की मीटिंग में पहुंच गई थीं

शारदाबाई इतनी सक्रिय और जिम्मेदार थीं कि 15 दिसंबर, 1940 को जब शरद पवार महज तीन दिन के थे, तब उन्हें गोद में लेकर ही बोर्ड की मीटिंग में पहुंच गई थीं।

शारदाबाई को जून 1938 में कांग्रेस पार्टी ने पुणे लोकल बोर्ड का चुनाव लड़ने के लिए कहा था। वह सीट महिला के लिए आरक्षित थी। 9 जुलाई, 1938 को वह निर्विरोध चुनी गईं। तब से 14 साल तक चुनी जाती रहीं। लेकिन, 1952 में एक घायल सांड़ के हमले की वजह से उनका राजनीतिक करियर ठहर गया। इस हमले के बाद वह चलने-फिरने से लाचार हो गईं और ताउम्र बैसाखियों के सहारे ही रह गईं।

1991 में पहली बार सांसद बने अजित

67 साल के अजित पवार 1959 में 22 जुलाई को पैदा हुए थे। राजनीति में तो वह 23 साल की उम्र में 1982 में ही आ गए थे और 1991 में पहली बार सांसद भी बन गए थे, लेकिन बतौर पार्टी अध्यक्ष उनका राजनीतिक सफर बहुत छोटा रहा।

2023 में उन्होंने एनसीपी से बगावत कर पार्टी तोड़ी और कानूनी संघर्ष के बाद अपने गुट के लिए एनसीपी का नाम व चुनाव चिह्न हासिल किया।

2024 के चुनाव में पहली बार वह बतौर एनसीपी अध्यक्ष चुनाव लड़े और एनसीपी (शरद पवार) की तुलना में अच्छा प्रदर्शन भी किया। लेकिन, बतौर अध्यक्ष उनकी असली परीक्षा तब होती जब पार्टी सत्ता से बाहर होती। अब उनके जाने के बाद पार्टी किस दिशा में जाएगी, यह देखना होगा।

अधूरा रह गया सीएम बनने का सपना

अजित पवार उप मुख्यमंत्री तो कई बार बने, लेकिन मुख्यमंत्री बनने की उनकी ख़्वाहिश अधूरी ही रह गई। 2024 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी यह ख़्वाहिश पत्रकारों को बताई थी। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, 'मैं महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं, लेकिन उप मुख्यमंत्री पर ही अटक जाता हूं। इससे आगे मौका ही नहीं मिल पाता है। 2004 में एनसीपी को मौका मिला था अपना मुख्यमंत्री बनाने का, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस को दे दिया।'

बता दें कि 2004 में 71 सीटों के साथ शरद पवार की एनसीपी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और सहयोगी कांग्रेस 69 पर थी। तब विलासराव देशमुख गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री बने थे।

#AjitPawarDeathमें अब तक
Story Loader