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भारत, Jun 06, 2026

अब मनमर्जी के साइज में नहीं बिकेगा खाने का तेल, सरकार ने तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज, कंपनियों को 3 महीने का समय

Cooking Oil New Rules: खाने के तेल खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर। केंद्र सरकार ने सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी समेत खाद्य तेलों की पैकेजिंग के लिए 9 मानक साइज तय किए हैं। जानिए नए नियम से ग्राहकों को क्या फायदा होगा।

New Rules For Edible Oil

New Rules For Edible Oil (AI Image)

New Rules For Edible Oil: अगर आप घर के लिए सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी या अन्य खाद्य तेल खरीदते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने खाने के तेल की पैकेजिंग को लेकर नया नियम लागू किया है। इसके तहत अब खाद्य तेल कंपनियों और आयातकों को अपने उत्पाद केवल तय मानक पैक साइज में ही बेचने होंगे।

सरकार का कहना है कि इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों के तेल की कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।

अब सिर्फ 9 तय पैक साइज में मिलेगा तेल

नए नियम के मुताबिक खाद्य तेलों की पैकेजिंग केवल नौ मानक आकारों में की जा सकेगी। ये पैक साइज 200 मिलीलीटर से लेकर 20 लीटर तक होंगे।

अभी बाजार में कई कंपनियां अलग-अलग और असामान्य आकार के पैक बेचती हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सा ब्रांड वास्तव में सस्ता या बेहतर है। सरकार का मानना है कि एक समान पैक साइज होने से कीमतों की तुलना आसान होगी।

किन तेलों पर लागू होगा नियम?

यह नियम देश में बनने वाले और विदेश से आयात होने वाले सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होगा। इनमें शामिल हैं।

पाम ऑयल
सोयाबीन तेल
सूरजमुखी तेल
सरसों का तेल
मूंगफली का तेल

इसके अलावा अन्य प्रमुख खाद्य तेल भी इस नियम के दायरे में आएंगे।

कंपनियों को मिला तीन महीने का समय

सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों और आयातकों को नए नियमों के अनुसार पैकेजिंग बदलने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सभी कंपनियों को अपने उत्पादों को निर्धारित पैक साइज में उपलब्ध कराना होगा।

पैकेट पर वजन की जानकारी भी देनी होगी

सरकार ने यह भी तय किया है कि जिन पैकेजों में तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी जाती है, उन पर उसके बराबर वजन की जानकारी भी देनी होगी।

इससे ग्राहकों को यह समझने में और अधिक सुविधा होगी कि वे कितनी मात्रा का तेल खरीद रहे हैं और किस ब्रांड की कीमत बेहतर है।

छोटे पैक को मिली छूट

सरकार ने 200 मिलीलीटर से छोटे पैक और कुछ कम उपयोग वाले खाद्य तेलों को इस नियम से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम आय वाले उपभोक्ताओं के लिए सस्ते छोटे पैक बाजार में उपलब्ध बने रहें।

उद्योग जगत से चर्चा के बाद लिया गया फैसला

उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार यह फैसला खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठनों के साथ व्यापक चर्चा के बाद लिया गया है। सरकार का दावा है कि जिन संगठनों से बातचीत की गई, वे देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल कारोबार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सरकार का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के हित में है और इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों के बीच सही तुलना कर बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।

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