
— बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया
नई दिल्ली। राष्ट्रीय बालिका दिवस और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर, वेदांता ने आज बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया। कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025–26 में अब तक भारत में अपने परिचालन क्षेत्रों में 5 लाख से अधिक बालिकाओं को सकारात्मक रूप से लाभ पहुंचाया है।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों एसडीजी 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), एसडीजी 5 (लैंगिक समानता) और एसडीजी 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के अनुरूप समग्र और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण के तहत, वेदांता बालिकाओं को उनके जीवन के तीन प्रमुख चरणों में सहयोग प्रदान करता है। इसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था और स्कूली शिक्षा में मजबूत आधार तैयार करना, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के माध्यम से स्वस्थ और आत्मविश्वासी किशोरावस्था को सक्षम बनाना; तथा उच्च शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों को सशक्त करना शामिल है। ये सभी पहल इस विश्वास पर आधारित हैं कि जब बालिकाओं को शिक्षा, सहयोग और अवसर मिलते हैं, तो परिवार और समुदाय एक साथ आगे बढ़ते हैं।
नंदघर कार्यक्रम से हुई शुरुआत
वेदांता की पहल की शुरुआत प्रारंभिक बाल्यावस्था में उसके प्रमुख नंद घर कार्यक्रम से होती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से 17 राज्यों में स्थित 11,000 से अधिक आधुनिकीकृत आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए 2 लाख से अधिक बालिकाओं तक पहुंच बनाई गई है। प्रारंभिक शिक्षा को पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सामुदायिक सहभागिता के साथ जोड़कर नंद घर सीखने, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं, साथ ही जमीनी स्तर पर माताओं और देखभालकर्ताओं को भी सशक्त बनाते हैं। जैसे-जैसे बालिकाएं औपचारिक स्कूली शिक्षा में आगे बढ़ती हैं, वेदांता अपने परिचालन क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर ध्यान देता है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में वेदांता एल्युमिनियम द्वारा संचालित प्रोजेक्ट विद्याग्रह डिजिटल-फर्स्ट दृष्टिकोण अपनाता है, जिसके तहत संरचित पाठ और शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे छात्र आत्मविश्वास बढ़ा सकें और अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें। कक्षा 10 की छात्रा काशिश कालसे जैसी छात्राओं के बोर्ड परीक्षाओं में उल्लेखनीय सुधार ने इस कार्यक्रम के शैक्षणिक निरंतरता पर सकारात्मक प्रभाव को दर्शाया है।
सीखने के महौल को मजबूत करना
इसके पूरक के रूप में प्रोजेक्ट विद्या छात्र–शिक्षक अनुपात में सुधार और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाकर सीखने के माहौल को मजबूत करता है। इसी तरह की अन्य पहलें—झारखंड में ईएसएल स्टील लिमिटेड की प्रोजेक्ट शिक्षा, राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की शिक्षा संबल, और वेदांता सेसा गोवा की प्रोजेक्ट वृद्धि—डिजिटल पहुंच, एसटीईएम शिक्षा और छात्रवृत्तियों के माध्यम से बुनियादी और माध्यमिक शिक्षा को समर्थन देती हैं। ये प्रयास सुनिश्चित करते हैं कि बुनियादी ढांचा या आर्थिक सीमाएं बालिकाओं की शैक्षणिक आकांक्षाओं में बाधा न बनें। उल्लेखनीय है कि सेसा गोवा की उत्कर्ष छात्रवृत्ति के लाभार्थियों में 50 प्रतिशत बालिकाएं हैं।
स्वच्छता पर केंद्रित कार्यक्रम चलाए
यह समझते हुए कि स्वास्थ्य और गरिमा के बिना शिक्षा आगे नहीं बढ़ सकती, वेदांता अपने सभी परिचालन क्षेत्रों में किशोरियों के लिए विशेष और लक्षित पहलें लागू करता है। ओडिशा के लांजीगढ़ में वेदांता एल्युमिनियम द्वारा किशोर प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य तथा माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता पर केंद्रित कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के तहत जागरूकता सत्र, एनीमिया जांच, पोषण सहायता, माहवारी स्वच्छता पर शिक्षा और पैड बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे किशोरियों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। ओडिशा में ही फेसर की प्रोजेक्ट लाडली माहवारी स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत को नया रूप दे रही है। किशोरी क्लबों के माध्यम से सुरक्षित स्थान बनाए गए हैं, स्वच्छता किट वितरित की गई हैं और किशोर लड़कों को भी शामिल किया गया है ताकि सामाजिक झिझक और भ्रांतियों को चुनौती दी जा सके। यह पहल संवाद, कला और कहानी कहने के जरिए समुदाय के सदस्यों तक पहुंच बनाकर एक सहयोगी वातावरण तैयार कर रही है। इस पहल का प्रभाव ओडिशा की 13 वर्षीय स्नेहा जैसी कहानियों में दिखाई देता है, जो बताती हैं कि फेसर की प्रोजेक्ट लाडली और किशोरी क्लबों ने उन्हें माहवारी से जुड़ी झिझक को दूर करने, स्वच्छता सहायता पाने और अपने स्वास्थ्य के बारे में आत्मविश्वास के साथ खुलकर बात करने में मदद की है।
जैसे-जैसे बालिकाएं उच्च शिक्षा और करियर की आकांक्षाओं की ओर आगे बढ़ती हैं, वेदांता उन्हें संरचित शैक्षणिक मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग प्रदान करता है। राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक की ऊंची उड़ान और छत्तीसगढ़ में बाल्को कनेक्ट जैसे कार्यक्रम आईआईटी, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए कोचिंग उपलब्ध कराते हैं, जिससे प्रथम-पीढ़ी के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और महत्वाकांक्षी करियर मार्ग अपना सकें।
खेल और कौशल की अहम भूमिका
शैक्षणिक सहयोग के साथ-साथ, वेदांता आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व विकसित करने में खेल और कौशल की अहम भूमिका को भी पहचानता है। हिंदुस्तान जिंक में भारत की पहली आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी से लेकर गोवा की सेसा फुटबॉल अकादमी तक—जहां सीनियर महिला टीम ने इंडियन विमेन्स लीग 2026 के लिए क्वालिफाई किया है—ये पहलें बालिकाओं को पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देने, आत्मबल बढ़ाने और प्रतिस्पर्धी मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम बना रही हैं। सेसा फुटबॉल अकादमी की खिलाड़ी आरौशी गोवेकर, जिन्हें 2025 में पहली बार भारतीय टीम में खेलने का अवसर मिला, इस बात का उदाहरण हैं कि किस तरह संरचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन जमीनी स्तर की समुदायों से आने वाली बालिकाओं को राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बना रहा है।
Published on:
28 Jan 2026 08:29 am
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