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‘जाति पाति की खाईयों को पाटने पर ही देश बनेगा हिन्दू राष्ट्र’

मेहन्दुरिया में विराट हिन्दू सम्मेलन के तहत कलश यात्रा व धर्म सभा आयोजित हुई, जिसमें जाति भेद मिटाकर सामाजिक समरसता व हिन्दू एकता पर जोर दिया गया।

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पांडाल में बैठी महिलाएं

फाइल फोटो-पत्रिका

राजसमन्द: रेलमगरा, उपखण्ड के मेहन्दुरिया मे रविवार को विराट हिन्दू सम्मेलन के तहत कलश यात्रा एवं धर्म सभा का आयोजन किया गया। कलश यात्रा कलश पूजन के पश्चात क्यारे वाले हनुमान मंदिर परिसर से रवाना हुई जो गाडरी मोहल्ला, ब्राह्मण मोहल्ला, वैष्णव मोहल्ला होते हुए राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रागण मे पहुँची।

कलश यात्रा मे ठाकुरजी के सुसज्जित बैवाण, बग्घीया, ऑपन जीप आदि मे राम दरबार, शिव परिवार, गणतपति आदि की झांकिया शामिल हुई साथ ही बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु सिर पर कलश धारण किए भक्ति गीत गाते शामिल हुई। कलश यात्रा में मेहन्दुरिया सहित क्षेत्र के दरीबा, माताजी का खेड़ा राजपुरा, शोपुरा, मालीखेड़ा, मकनपूरिया आदि गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु शामिल हुए।

कलश यात्रा समाप्ति पर राजकीय माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित धर्म सभा में नृसिंह द्वारा आकोला के संत बजरंगदास त्यागी ने कहा कि भारत को विश्व गुरू बनाने के लिए तथा अपनी संस्कृति व भारत को हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा का देश बनाने के लिए सभी जातियों को एक मंच पर आकर सामाजिक भाईचारा तथा जाति पाती की खाई को खत्म करना होगा। संत ने कहा कि यह प्रयास सराहनीय है।

धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए आर एस एस के विभाग सर संघ चालक फतहलाल सामसुखा ने कहा कि बल बुद्धि विध्या देऊ मोही हरउ कलेश विकार। हम हनुमान चालिसा भगवान हनुमानजी से मांगते है, हम बल व बुद्धी ओर विध्या से परिपूर्ण हमे दो जिससे हम राष्ट्र के काम आ सके, हिन्दू धर्म के काम आ सके तथा हमारे धर्म ओर हमारे राष्ट्र के सारे जगडे विकार खत्म हो जाए, देश में आज के परिपेक्ष मे हिन्दुओ मे जागृति का आनीं जरूरी है, जिससे विश्वशान्ति कायम हो सके।

आज संकल्प ले सब लोग आने वाले दिनो भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाकर रहेंगे। इससे पूर्व अतिथि के रूप में उपस्थित संत बजरंगदास महाराज, फतहलाल शामसुखा, जगदीशचंद्र दाधीच एवं महिला वक्ता अरूणा जोशी का चतरसिंह राजावत, ओमप्रकाश वैष्णव, जगदीश ओजा, किसनलाल सालवी, भैरूलाल बैरवा तथा फतह लाल, धनराज प्रजापत, इन्द्रसिंह राणावत, रामस्वरूप ईनाणी, प्रेम देवी, प्रभा देवी, पिंकी खटीक, राधा देवी, सुषमा राजपुत, बाबू जोगी, कन्हैयालाल भील, हीरालाल आदि ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन भगवानलाल सुखवाल ने किया।