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​शिकायत नहीं, खुद करें स्वच्छता की पहल

बीकानेर शहर को साफ-स्वच्छ और सुन्दर बनाने के लिए सभी को आगे आना होगा। पत्रिका ने इस मुद्दे पर लोगों से राय मांगी। बड़ी संख्या में लोगों ने सुझाव दिए। इसमें एक बात पर सभी एकमत नजर आए कि स्वच्छता के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने की जरूरत है।

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बीकानेर. शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी है। स्वच्छता अ​भियान और सफाई के लिए जनजागरूकता प्रयास के बावजूद ज्यादा सुधार नहीं हो रहा है। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई के लिए सीमित संसाधनों की बात कही जाती है। इस मुद्दे पर पत्रिका को आमजन ने कई सुझाव भेजे। प्रस्तुत है कुछ चुनिंदा लोगों को विचार-

खुद करे शुरुआत, मिलेंगे परिणाम

स्वच्छता को लेकर ​शिकायत हर कोई करता है। सभी को गली-मोहल्ले, बाजार और सड़क सब साफ चाहिए। परन्तु इसमें हम कितना योगदान दे रहे है, इस पर भी मंथन करना चाहिए। ऑवर फोर नेशन के माध्यम से ​शिकायत नहीं सहयोग मुहिम इसी सोच के साथ शुरू की गई। इसमें गंदगी की ​शिकायत करने की जगह खुद सप्ताह में रविवार के एक दिन कुछ समय स्वच्छता के लिए देना शुरू करना है। इसके परिणाम सामने है। आज शहर में दो सौ से अ​धिक स्थानों पर उनकी टीम सफाई कार्य कर चुकी है।

- सुधीश शर्मा, टीम लीडर, ऑवर फोर नेशन

स्थानीय निकाय जिम्मेदारी समझे

शहर को साफ-सुथर, स्वच्छ और सुन्दर रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। स्थानीय निकाय का सबसे प्रमुख कार्य ही यही होता है। शहरी नागरिक इसके लिए बकायदा हाउस टैक्स से लेकर अन्य टैक्स भी चुकाते है। इसके बावजूद शहर में सफाई कार्य ठीक से नहीं होता। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की मॉनिटरिंग और साधन-संसाधन भी निगम को बढ़ाने चाहिए।

- जिया उर रहमान आरिफ, स्थानीय निवासी

स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अ​भियान इसी सोच से शुरू किया कि देश की स्वच्छता के मामले में विश्व पटल पर छवीं सुधरे। स्वच्छता की कमी और खुले में शोच का दाग हटे। स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी है, इसे सभी को समझना होगा। सभी सामूहिक प्रयास करें तो हालात बदल जाएंगे। स्वच्छता अ​भियान में तेजी से काम हो रहा है।

- अशोक प्रजापत, सामाजिक कार्यकर्ता

गांधीजी की सोच को साकार करें

गांधीजी ने स्वच्छता का संदेश दिया। जिसे अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अ​भियान के तहत आगे बढ़ाया। लोगों की सोच में बीते एक दशक में स्वच्छता को लेकर बड़ा बदलाव आया है। अब गली, मोहल्ले और घरों में इसके लिए जनजागरूकता पैदा करने की जरूरत है। गांधी जी की सोच को आगे बढ़ाना है।

- सुरेन्द्र शेखावत, सामाजिक कार्यकर्ता