1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दूधियाखेड़ी माता : बरसों पुराना मंदिर, दूरदराज से आते हैं दर्शनार्थी

आंवा व कनवास के बीच स्थित दूधियाखेड़ी माता मंदिर परिसर गत 25 जनवरी से मेला चल रहा है। जिसमें रविवार माता का दिन होने से यहां पहुंचने वाले दर्शनार्थियों की संख्या दोगुनी हो गई। जिससे मंदिर में दर्शन करने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इतना ही नहीं व्यवस्थापकों को भी दिक्कत हुई। […]

2 min read
Google source verification
16 दिवसीय मेला 25 जनवरी से प्रारंभ हुआ और 9 फरवरी को समापन होगा
Play video

आंवा व कनवास के बीच स्थित दूधियाखेड़ी माता मंदिर परिसर गत 25 जनवरी से मेला चल रहा है। जिसमें रविवार माता का दिन होने से यहां पहुंचने वाले दर्शनार्थियों की संख्या दोगुनी हो गई। जिससे मंदिर में दर्शन करने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इतना ही नहीं व्यवस्थापकों को भी दिक्कत हुई। इधर, मेले में लगी दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ बढ़ने से दुकानदारों को फुर्सत नहीं मिल रही है। मंदिर में माता की पूजा करवाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पुलिस भी पूरी तरह चाकचौबंद है। मेले का समापन आगामी 9 फरवरी को होगा।

35 वर्ष पूर्व बैल गाड़ियों व पैदल आते थे लोग

करीब 35 वर्ष पूर्व बैल गाड़ियां जोतकर गांवों के लोग परिवार सहित मेला देखने आया करते थे। चूंकि संसाधनों की कमी थी। साथ ही बसों का आवागमन भी शहरों तक ही सीमित था। ऐसे में गांवों लोग आ तो बैलगाडि़यों या फिर पैदल ही मेला देखने के लिए सुबह-सुबह ही अपने गांवों से निकल जाते थे। कई परिवार को मेला परिसर में ही खाना बनाया करते थे। क्योंकि माता मंदिर परिसर में चारों तरफ जंगल था। 

बाइक, ट्रेक्टर ट्रॉली बने आवागमन के साधन

कोटा कनवास वाया आंवा मुख्य मार्ग पर दूधियाखेड़ी माता मंदिर स्थित होने के कारण आवागमन के साधन सुगमता से उपलब्ध हो जाते हैं। इसी कारण दिन के समय अधिक भीड़ रहती है। मेले में आने वाले श्रदालु ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र से है। गांवों में आवागमन के सांधनों की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने साधनों जिनमें प्रमुखतया ट्रैक्टर ट्रॉलियां ही है। इनमें भरकर आते हैं। इसके अलावा बाइकों पर भी कई ग्रामीण मेला देखने पहुंच रहे हैं।

चकरी, नाव, ब्रेक डांस व मंकी वास आकर्षण का केन्द्र

किसी भी मेले के प्रति बच्चों का उत्साह सामान्य व्यक्तियों से अधिक होता है। इसी कारण झूले, चकरी, ब्रेक डांस, रेल, मंकी वास, नाव बच्चो के आकर्षण का केन्द्र बने हुए है। बड़े झूले दो किलोमीटर दूर से ही दिखाई दे रहे है।

पुलिसकर्मी भी पूरी तरह चौकस

माता मेले में बाजारों को सुनियोजित करने के कारण भीड़ नियंत्रण में है। फिर भी प्रसाशन ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने हेतु मेला ग्राउण्ड में अस्थायी पुलिस चौकी बना रखी है। पुलिस चौकी में सीआई अनूप सिंह मौजूद रहते हैं तथा पुलिस चौकी के माध्यम से पुलिस कर्मी मुख्य मार्ग, मन्दिर का प्रवेश द्वार, मन्दिर परिसर व मेले के विभिन्न बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखते है। मेले का आयोजन ग्राम पंचायत जालिमपुरा की ओर से हर वर्ष किया जाता है।