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भारत की वैदिक संस्कृति विश्व को दिशा देने में सक्षम : डॉ. सरोज गुप्ता

भारत की वैदिक संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना विश्व को दिशा देने में सक्षम है। भारतीय जीवन-दृष्टि, योग वेदांत और वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे विचार ने वैश्विक समाज को नैतिक एवं आध्यात्मिक संतुलन प्रदान किया है। यह बात एक्सीलेंस गल्र्स कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि धर्म, ज्ञान और सहिष्णुता भारतीय परम्परा की पहचान है जो देश को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाती है।

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सागर

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Rizwan ansari

Jan 18, 2026

भारत की वैदिक संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना विश्व को दिशा देने में सक्षम है। भारतीय जीवन-दृष्टि, योग वेदांत और वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे विचार ने वैश्विक समाज को नैतिक एवं आध्यात्मिक संतुलन प्रदान किया है। यह बात एक्सीलेंस गल्र्स कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि धर्म, ज्ञान और सहिष्णुता भारतीय परम्परा की पहचान है जो देश को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाती है। विशिष्ट अतिथि जनभागीदारी सदस्य प्रासुक जैन ने कहा कि दर्शन मानव को समाज, राष्ट्र और विश्व से जोडऩे की भावना सुदृढ़ करता है। प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि उदारीकरण से औद्योगिक विकास बढ़ा है और कृषि क्षेत्र में परिवर्तनशीलता देश को वैश्विक शक्ति की दिशा में ले जाएगी।
समापन सत्र के अवसर पर दो दिवसों में पढ़े गए शोध आलेखों के प्रतिवेदन को संगोष्ठी की आयोजन सचिव ले. डॉ. अंशु सोनी ने प्रस्तुत किया। शोध संगोष्ठी के द्वितीय दिवस में 18 शोध आलेखों का वाचन विद्वानों द्वारा किया गया। डॉ. दीपक मोदी, आरती गुप्ता, गिरीश कुमार रैकवार, अपर्णा पाण्डेय, डॉ. प्रशांत सोनी, राजकुमार अहिरवार, हर्ष ताम्रकार, प्राची पाण्डेय, अंकेश कुमार, जीवन लाल अहिरवार, दिनेश अहिरवार, डॉ. अश्विनी सूर्यवंशी आदि के द्वारा शोध आलेखों का वाचन किया गया। संचालन डॉ. प्रहलाद सिंह ने किया। शोध संगोष्ठी की समन्वयक डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने आभार माना।