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jharkhand: हे छठी मइया तोहर महिमा अपार… गीतों से गूंजा नदी का तट

लोकआस्था के महापर्व छठ के अवसर पर झारखंड में छठ मईयां के गीत गूंजते रहे। इस मौके पर व्रतियों ने नदी तालाब आदि में खड़े होकर छठ मईयां की उपासना की और परिवार में सुख-समृदि्ध की कामना की।

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jharkhand: झारखंड में लोकआस्था, पवित्रता तथा सूर्य उपासना के महापर्व छठ के पावन अवसर पर रांची के हटनिया तालाब छठ घाट पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर झारखंडवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। सोरेन ने जयप्रकाश नगर, पहाड़ी टोला निवासी पिंकी देवी, अलकापुरी, रातू रोड निवासी उर्मिला देवी, मेट्रोगली, बिरला मैदान निवासी पूनम देवी एवं कचहरी चौक में पान दुकान चलाने वाले विनोद वर्मा आदि छठव्रती के परिजनों के साथ भगवान भास्कर को संध्या अर्घ्य अर्पित कर आशीर्वाद लिया। https://zimbea-develop.go-vip.net/

सुख, समृद्धि, खुशहाली, शांति एवं निरोगी काया की कामना

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा की अलौकिक परंपरा निभाने की संस्कृति सदियों से चली आ रही है। छठ महापर्व प्रकृति, कृतज्ञता, सामाजिक तथा पारिवारिक एकता का प्रतीक है। मैं इस अवसर पर समस्त राज्यवासियों को छठ महापर्व की हार्दिक बधाई एवं अशेष शुभकामनाएं देता हूं। छठी मईया एवं भगवान सूर्य देव से प्रार्थना है कि समस्त झारखंडवासियों के कल्याण के साथ-साथ सुख, समृद्धि, खुशहाली, शांति एवं निरोगी काया प्रदान करें।

घरों में गूंज रहे छठ के गीत

छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

घरों में गूंज रहे छठ के गीत

छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

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छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

घरों में गूंज रहे छठ के गीत

छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

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छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

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छठ को लेकर राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड के घर-घर में छठ के गीत गूंज रहे हैं। “ केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय, आदित लिहो मोर अरगिया., दरस देखाव ए दीनानाथ., उगी है सुरुजदेव., हे छठी मइया तोहर महिमा अपार., कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय..... , गीत सुनने को मिल रहे हैं।”

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