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किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 63 …. बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (21 जनवरी 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 63 में भेजी गई कहानियों में ये कहानियां सराहनीय रही हैं।

दयालु पेड़ और उसके दोस्तशिवप्रताप सिंह सोढ़ा, उम्र- 12 वर्षएक हरे-भरे मैदान में एक बहुत बड़ा और घना पेड़ था। यह कोई साधारण पेड़ नहीं था। उसके तने पर आंखें और मुस्कान थी। वह पेड़ बहुत दयालु था और सभी जानवर उसे प्यार से दादा पेड़ कहते थे। उसकी घनी पत्तियां गर्मी में ठंडी छाया […]

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जयपुर

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Tasneem Khan

Jan 27, 2026

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 63 …. बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (21 जनवरी 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 63 में भेजी गई कहानियों में ये कहानियां सराहनीय रही हैं।

दयालु पेड़ और उसके दोस्त
शिवप्रताप सिंह सोढ़ा, उम्र- 12 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान में एक बहुत बड़ा और घना पेड़ था। यह कोई साधारण पेड़ नहीं था। उसके तने पर आंखें और मुस्कान थी। वह पेड़ बहुत दयालु था और सभी जानवर उसे प्यार से दादा पेड़ कहते थे। उसकी घनी पत्तियां गर्मी में ठंडी छाया देती थीं और उसकी जड़ें सबको सुरक्षा का एहसास कराती थीं। एक दिन बारिश बहुत तेज हुई। पास ही रहने वाले छोटे-छोटे पिल्ले डर गए। उन्हें कहीं सूखी और सुरक्षित जगह नहीं मिल रही थी। तभी दादा पेड़ ने अपनी डालियां फैलाकर कहा, डरो मत बच्चों, मेरी छाया में आ जाओ। सारे पिल्ले खुशी-खुशी पेड़ के पास आ गए। बारिश थमने तक वे वहीं सुरक्षित बैठे रहे। कुछ दूरी पर एक छोटा-सा पौधा भी था। जो कमज़ोर था। तेज हवा से वह हिलने लगा। दादा पेड़ ने अपनी जड़ों से मिट्टी को मजबूत किया ताकि वह पौधा गिर न जाए। धीरे-धीरे वह पौधा भी बड़ा होने लगा। समय बीतता गया। पिल्ले बड़े होकर समझदार कुत्ते बन गए और उस पेड़ की रक्षा करने लगे। वे किसी को भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाने देते थे। पूरा जंगल जान गया कि अगर सब एक-दूसरे की मदद करें, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
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चिड़िया अपना घर
सोवना अलीशा ओझा, 8- वर्ष
एक छोटे से गांव में एक विशाल बरगद का पेड़ था। उसकी शाखाएं इतनी घनी थीं कि पूरे गांव को छाया देती थीं। उस पेड़ पर कई चिड़ियां अपना घर बनाकर रहती थीं। पेड़ के नीचे एक छोटा सा कुत्ता टॉम रहता था, जो सबका प्यारा था। एक दिन एक परिवार उस गांव में आया। पति-पत्नी और उनके दो बच्चे बहुत खुश थे। जब वे बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे तो बच्चे पेड़ को देखकर चिल्लाने लगे। चिड़ियां भी खुशी से चहचहाने लगीं, और टॉम भौंकते हुए बच्चों के पास दौड़ा। पेड़ की शाखाओं पर बैठी चिड़ियों ने बच्चों को देखा और उन्हें दाना खिलाने लगीं। टॉम भी बच्चों के साथ खेलने लगा। परिवार ने पेड़ के नीचे बैठकर कई शामें बिताईं। पत्नी ने कहा, यह पेड़ हमारे लिए बहुत खास है। पति ने कहा हां यह पेड़ सबको खुशियां बांटता है। चिड़िया पेड़ पर गीत गाती रहीं। टॉम बच्चों के साथ खेलता रहा और परिवार ने उस बरगद के पेड़ को अपना बना लिया।
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बरगद दादा और नन्हा पौधा
आराध्या सोनारे, उम्र _11 वर्ष
एक बहुत ही शांत और हरे-भरे मैदान में एक विशाल बरगद का पेड़ खड़ा था। वह इतना पुराना था कि उसे उस इलाके का 'दादा' माना जाता था। बरगद दादा का चेहरा हमेशा मुस्कुराता रहता था और उनकी लंबी-लंबी जटाएं ज़मीन को छूती थीं। उनके घने पत्तों के बीच से छनकर आने वाली धूप ज़मीन पर सुनहरी चादर जैसी लगती थी। बरगद दादा के चरणों में चार नन्हे पिल्ले अक्सर आकर बैठते थे। कोई गुलाबी रंग का था तो कोई भूरा, लेकिन उन सबको बरगद दादा की छांव में सबसे ज़्यादा सुरक्षित महसूस होता था। वे वहां खेलते, कूदते और थककर सो जाते। बरगद दादा भी अपनी शाखाओं को हिलाकर उन पर ठंडी हवा करते थे। उसी मैदान के एक कोने में एक नन्हा सा पौधा भी उग आया था। उस नन्हे पौधे पर कुछ लाल-लाल छोटे फल लगे थे। वह पौधा रोज़ बरगद दादा को देखता और मन ही मन सोचता, "काश! मैं भी इतना बड़ा होता। मेरी भी ऐसी जटाएं होतीं और हज़ारों पक्षी मुझ पर बसेरा करते। अभी तो मैं इतना छोटा हूं कि तेज़ हवा भी मुझे डरा देती है। एक दोपहर, जब सूरज बहुत तेज़ चमक रहा था, नन्हा पौधा मुरझाने लगा। यह देखकर बरगद दादा ने अपनी एक बड़ी शाखा को थोड़ा झुकाया ताकि नन्हे पौधे पर भी छांव पड़ सके। नन्हे पौधे ने आंखों में नमी भरकर कहा, "दादा, आप कितने महान हैं! आप सबको सुरक्षा देते हैं। क्या मेरा जीवन बस यहीं खत्म हो जाएगा? क्या मैं कभी आपकी तरह काम आ सकूंगा?" बरगद दादा ने बहुत ही कोमल स्वर में कहा, "नन्हे दोस्त, उदास मत हो। आज जिसे तुम अपनी कमजोरी समझ रहे हो, वही तुम्हारी शक्ति है। ये छोटे फल जो तुम पर लगे हैं, वे आने वाले कल के विशाल पेड़ों के बीज हैं। तुम आज छोटे हो, इसलिए तुम तूफ़ान में झुक सकते हो और टूटने से बच सकते हो। मैं बड़ा हूं तो मेरी जिम्मेदारियां भी बड़ी हैं।
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एक बरगद का पेड़ था
आदम अली रजा, उम्र 9 साल
गांव के बाहर एक बरगद का पेड़ था उसके नीचे एक कुत्ते का परिवार रहता था कुत्ता कुत्तियां ओर उनके दो बच्चे। कुत्ता कुत्तियां गांव में जाते जो कुछ खाने को मिलता खाकर कुछ खाना अपने मुंह में बच्चों के लिए लेकर आते ओर बच्चों को खिलाते और वहीं पेड़ की छांव में सो जाते वह पेड़ उनको धुप वर्षा से बचाता कुत्ते के बच्चे पेड़ के चारों ओर चक्कर लगाते खेलते कुदते मस्ती करते रहते थे। एक दिन एक लकड़हारा कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ को काट ने आया और पेड़ को काटने लगा। कुत्तों को लगा कि यह प्यारा दोस्त पेड़ कट जायेगा तो हम कहां जायेंगे यह सोचते ही कुत्ते का परिवार उस लकड़हारा
पर भोंकने लगे और झपटा मार कर काटने लगे। यह देखकर लकड़हारा जान बचाकर भाग गया अब पेड़ भी खुश और कुत्तों का परिवार भी खुश।

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बरगद पेड़ का वादा
काव्या चौधरी, उम्र- 10 वर्ष
एक बार हरे-भरे बगीचे में एक बड़ा, खुश बरगद का पेड़ रहता था। उसके नीचे चार नटखट पिल्ले खेलते थे। एक दिन उन्होंने पास में एक छोटा सा पौधा देखा। पौधा हवा से हिल रहा था और ऐसा लग रहा था मानो मदद मांग रहा हो। बरगद का पेड़ प्यार से बोला चिंता मत करो! मैं तुम्हें धूप, हवा और अपना साथ दूंगा। पिल्लों ने पौधे को रोज पानी दिया। दिन बीतते गए और वह छोटा पौधा धीरे-धीरे मज़बूत होता गया। कुछ महीनों बाद वही छोटा पौधा एक सुंदर पेड़ बन गया।
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दयावान पेड़ व कुतिया के बच्चे
अनिरुद्ध श्रृंगी, उम्र -10
एक बार एक गांव के पास जंगल में एक बरगद का विशाल पेड़ था उस पेड़ के नीचे एक शेंकी नाम कि एक कुतिया व उसके तीन छोटे बच्चे थे। वह सभी पेड़ के नीचे उसके तने के कोटर में रहते थे वह पेड़ उनके लिए छाया व फल दिया करता था वह उसके बच्चों का ध्यान रखता था जिससे वह सभी हसीं खुशी रह रहे थे।एक दिन उन बच्चों कि मां भोजन कि तलाश में जंगल में दूर चली गई ओर उस पेड़ के नीचे उसके बच्चे खेल रहे थे तभी अचानक एक लखडहारा आ गया जिसे एक बहुत बड़े पेड़ कि तलाश थी।उसने बरगद के पेड़ को देखकर कहा कि अगर में इस पेड़ को काटकर बेच दो तो में बहुत धनवान बन जाउंगा एह सोचकर उस पेड़ को काटने का निश्चिये किया ओर कहा कि मै कल आकर इस पेड़ को काटकर ले जावूंगा इस बात को वह पेड़ व बच्चे सुन रहे थे जिससे वह सभी दुखी हो गए शाम को जब वह कुतिया आई तब उसके बच्चों ने उसकी मां सब बात बताई तब उसने पेड़ को बचाने का निर्णय किया कुछ भी हो जाये इस पेड़ को बचाना है।सुबह जब वह लखडहारा आया तब उस कुतिया व उसके बच्चों ने मिलकर उसके ऊपर हमला कर दिया जिससे वह लखड़हारा डर कर वहां से भाग गया। जिस से उस पेड़ कि जान बच गई वह पेड़ व बच्चे सभी बहुत खुश हो गये तथा पेड़ ने उन सब का धन्यवाद किया ओर वो सभी हंसी खुशी रहने लगे।
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देव यादव, उम्र - 9 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान के बीचों-बीच एक अनोखा पेड़ रहता था। उसकी घनी पत्तियां बादल जैसी फैली रहतीं और जड़ें जमीन से लटककर मानो किसी को बाहों में लेने को तैयार रहतीं। सब उसे प्यार से बाबा वृक्ष कहते थे, क्योंकि उसकी आंखों में अपनापन और चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। उसी मैदान के एक कोने में तीन नन्हे पिल्ले रहते थे। चीकू, मीकू और गोलू। वे बहुत छोटे थे और बारिश, धूप या ठंडी हवा से डर जाते थे। एक दिन तेज़ बारिश शुरू हो गई। हवा भी ज़ोर-ज़ोर से चलने लगी। तीनों पिल्ले घबरा गए और इधर-उधर छिपने लगे, लेकिन कोई सुरक्षित जगह नहीं मिली। तभी बाबा वृक्ष ने अपनी लटकती जड़ों को थोड़ा और फैला दिया। उसने प्यार भरी आवाज़ में कहा, “डरो मत बच्चों, मेरे पास आ जाओ।” तीनों पिल्ले दौड़कर उसके पास आ गए। पेड़ की घनी पत्तियों ने छत बना दी और जड़ों ने दीवार। बारिश थम गई, लेकिन पिल्लों के दिल में सुरक्षा बस गई। पास ही एक छोटा-सा पौधा भी था, जो तेज हवा में झुक रहा था। बाबा वृक्ष ने उसे भी अपनी छाया में ले लिया। पिल्लों ने मिलकर उस पौधे के पास मिट्टी दबाई और पानी दिया। उस दिन से मैदान में एक बात सब जान गए जो बड़ा होता है, उसकी ज़िम्मेदारी होती है कि वह छोटों की रक्षा करे। बाबा वृक्ष, तीनों पिल्ले और वह नन्हा पौधा मिलकर एक खुशहाल परिवार बन गए जहां सुरक्षा और सहयोग हमेशा बना रहा।
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किताब पढ़ने से ज्ञान मिलता है

हरमाइनी यादव, उम्र - 11 साल
गीता और सोनू दो भाई बहन थे। गीता को किताबें पढ़ना पसंद था और सोनू को संगीत सुनना अच्छा लगता था। सोनू बिस्तर पर लेटा हुआ रेडियो में संगीत सुन रहा था और पास में किताब रखी थी। गीता ने उसे देखा और मुस्कुराई। गीता ने प्यार से कहा 'किताब पढ़ने से हमें ज्ञान मिलता है ' सोनू मुस्कुराकर बोला और संगीत सुनने से मन खुश रहता है और थकान दूर हो जाती हैं। मां ने दोनों की बातें सुनकर कहा कि पढ़ाई और संगीत दोनों बहुत जरूरी होते हैं तभी सोनू धीमा संगीत चलाकर किताब पढ़ने लगा और गीता उसे समझाने लगी और फिर उन्होंने निश्चय किया कि वे रोज समय निकालकर किताब भी पढ़ेंगे और संगीत भी सुनेंगे। दोनों बहुत खुश हो गए।
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बरगद की समझदारी
अदम्य चतुर्वेदी, उम्र: 7 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान में एक बहुत बड़ा और पुराना बरगद का पेड़ था। उसकी शाखाएं दूर तक फैली हुई थीं और उसकी छाया ठंडी और सुकून देने वाली थी। बरगद बहुत दयालु और समझदार था। पास ही एक बड़ा कुत्ता और उसके तीन नन्हे पिल्ले रहते थे। वे अक्सर धूप और गर्मी से परेशान हो जाते थे। एक दिन तेज धूप पड़ रही थी। बड़ा कुत्ता अपने तीनों
पिल्लों को लेकर बरगद के पास आया और बोला, बरगद दादा, क्या हम आपकी छाया में रह सकते हैं? बरगद ने मुस्कुराकर कहा, ज़रूर बच्चों, मेरी छाया सबके लिए है। कुत्ता और पिल्ले खुशी-खुशी बरगद की छाया में बैठ गए और आराम करने लगे। यह सब देखकर पास में खड़ा एक छोटा पौधा, जिसकी आंखें और हाथ थे वो उदास हो गया। वह बरगद से बोला, बरगद दादा, आपने मुझे अपने नीचे जगह क्यों नहीं दी? बरगद ने प्यार से उत्तर दिया, प्यारे पौधे, कुत्ता और पिल्ले मेरी छाया में आकर धूप और गर्मी से बच जाते हैं। लेकिन तुम्हें बढ़ने के लिए धूप की ज़रूरत है। अगर तुम मेरे नीचे आओगे, तो तुम्हें धूप नहीं मिलेगी और तुम बड़े नहीं हो पाओगे।
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दयालु पेड़ और उसके छोटे दोस्त
कनिका चौधरी, उम्र : 9 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान के बीचों-बीच एक बड़ा घना और दयालु पेड़ था। उसकी डालियां छाया से भरी रहती थीं और जड़ें धरती को कसकर थामे रहती थीं। उस पेड़ की सबसे खास बात यह थी कि वह बोल सकता था और सबको बहुत प्यार करता था। आसपास रहने वाले जानवर उसे “दादा पेड़” कहकर बुलाते थे। एक दिन तेज धूप पड़ी। छोटा खरगोश, नन्हा बिल्ली का बच्चा और तीन पिल्ले खेलते-खेलते थक गए। वे सब भागकर दादा पेड़ की छाया में आ बैठे। दादा पेड़ ने मुस्कराकर कहा, मेरी छाया में बैठो, तुम्हें ठंडक मिलेगी। उसकी पत्तियां हवा में सरसराईं, जैसे लोरी गा रही हों। थोड़ी ही देर में सबको सुकून मिलने लगा। अचानक तेज हवा चली और पास लगा एक नन्हा पौधा हिलने लगा। जानवर डर गए। दादा पेड़ ने अपनी मजबूत जड़ों से मिट्टी को और कस लिया और अपनी बड़ी डालियों से उस पौधे को हवा से बचाया। उसने कहा, डरो मत, हम साथ हैं। जानवरों ने मिलकर उस पौधे के चारों ओर पत्थर रख दिए ताकि वह गिर न जाए। शाम होते-होते हवा थम गई। नन्हा पौधा सुरक्षित था और सब खुश थे। पिल्लों ने खुशी में भौंककर, खरगोश ने उछलकर और बिल्ली के बच्चे ने म्याऊं करके धन्यवाद कहा। दादा पेड़ बोला, जब हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, तभी दुनिया सुंदर बनती है। उस दिन से सभी जानवरों ने तय किया कि वे हमेशा पेड़ों और प्रकृति की रक्षा करेंगे, क्योंकि दया और एकता से ही सच्ची खुशी मिलती है।
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मैं एक जादुई पेड़ हूं
आराध्या जैन, उम्र- 12 वर्ष
एक बार एक बड़ा घना जंगल था। वह जंगल बहुत विशाल था। उस जंगल में वीरू नाम का एक कुत्ता अपने परिवार के साथ रहता था। वीरू बहुत दयालु था। एक दिन वीरू अपने परिवार के साथ टहलने के लिए निकलता है। रास्ते में एक छोटा पौधा उसे दिखाई देता है। जो जादूई था मगर बहुत बुरा था। उसने अपने जादू से उन लोगों का खाना छीन लिया और खुद खा गया। तब वीरु ने कहा कि तुमने हमारा खाना क्यों खाया अब मेरा परिवार क्या खाएगा उसने कहा कि मैं काफी वक्त से भूखा हूं इसलिए मैंने तुम्हारा खाना खा लिया। वीरू काफी सीधा और भोला था। वह उस पौधे के झासे में आ गया और फिर वहां से आगे की तरफ बड़ा वहां वह एक बड़ा सा बरगद का पेड़ दिखा जो सूखा हुआ था। तो वीरों उसे पानी देता है और पेड़ हरा हो जाता है। वह पेड़ जादुई था उसने वीरू और उसके परिवार से कहा की तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया वीरू मैं एक जादुई पेड़ हूं। बोलो तुम्हें क्या चाहिए तुम जो मांगोगे मैं तुम्हें दे दूंगा। वीरू ने कहा कि मुझे तो कुछ नहीं चाहिए मगर मेरे परिवार ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया है। तुम उनके लिए खाने का इंतजाम कर दो। जादुई पेड़ उसकी अच्छाई को देख करके खुश होकर वीरु को अमीर कर देता है।