
प्रो. गौरव वल्लभ, अंशकालिक सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 को सरकार की मध्यम अवधि की आर्थिक रणनीति के एक सुविचारित समेकन के रूप में देखा जाना चाहिए। ऐसे वैश्विक परिदृश्य में जहां व्यापार तनाव लगातार बने हुए हैं, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि धीमी पड़ रही है और आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर नई चिंताएं उभर रही हैं, यह बजट घरेलू क्षमता निर्माण पर भरोसा जताता है। इसका संदेश स्पष्ट है- सार्वजनिक निवेश का विस्तार, निजी पूंजी को आकर्षित करना, तकनीकी क्षमता को गहरा करना और सुधार व विनियमन-मुक्ति की लंबी, अपेक्षाकृत अल्प-प्रचारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।
बजट में अवसंरचना के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता जारी है। 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है, जो चालू वर्ष के लगभग 11.2 लाख करोड़ से करीब 9 प्रतिशत अधिक है। यह पिछले कई वर्षों की उस प्रवृत्ति का विस्तार है, जिसमें केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2015 के 2 लाख करोड़ रुपए से तेजी से बढ़ा है। यह सार्वजनिक व्यय की संरचना में उपभोग से निवेश की ओर एक निर्णायक बदलाव को रेखांकित करता है। इस व्यय के भीतर परिवहन अवसंरचना को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जो मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलूरु, चेन्नई-बेंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेंगे। इन परियोजनाओं को अगले दशक में चरणबद्ध तरीके से और मिश्रित वित्तपोषण मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। यात्री परिवहन के साथ-साथ बजट लॉजिस्टिक्स दक्षता पर भी जोर देता है। उन्नत फ्रेट कॉरिडोर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों का विस्तार और लगभग 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन, भारत की अब भी ऊंची अंतरराष्ट्रीय तुलना वाली लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित हैं। इसके पूरक के रूप में, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ की परिकल्पना की गई है। प्रत्येक क्षेत्र के लिए पांच वर्षों में 5000 करोड़ रुपए का समर्पित वित्तीय समर्थन प्रस्तावित है, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में शहरी अवसंरचना, औद्योगिक क्लस्टर और सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जा सके। यदि अवसंरचना बजट की भौतिक रीढ़ है, तो तकनीक और नवाचार उसकी रणनीतिक धार हैं। 40,000 करोड़ रुपए के विस्तारित परिव्यय के साथ ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की घोषणा भारत को वैश्विक मूल्य शृंखला में ऊपर ले जाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। सेमीकंडक्टर अब केवल औद्योगिक इनपुट नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता से जुड़ी रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में देखे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 10,000 करोड़ रुपए का एमएसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित किया गया है, जो व्यापक सब्सिडी के बजाय लक्षित विकास पूंजी उपलब्ध कराएगा, ताकि सक्षम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विस्तार कर सकें और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ सकें।
समष्टि आर्थिक दृष्टि से बजट संतुलन साधने का प्रयास करता है। जीडीपी के 4.3 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य, पूंजीगत व्यय बढ़ाते हुए भी समेकन की दिशा में एक सार्थक कदम है। सकल बाजार उधारी लगभग 17.2 ट्रिलियन और शुद्ध उधारी 11.7 ट्रिलियन अनुमानित है, जिसे ऋण बाजार की स्थिरता को ध्यान में रखकर समायोजित किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच अनुमानित की गई है, जो इस विश्वास को दर्शाती है कि घरेलू निवेश और सुधार गति बाहरी चुनौतियों का सामना कर सकती है।
समग्र रूप से, बजट 2026 एक स्पष्ट मंशा का दस्तावेज है। यह बड़े लोकलुभावन कदमों से परहेज करते हुए अवसंरचना, तकनीक और क्रमिक सुधारों पर आधारित विकास मॉडल को मजबूत करता है। इसकी अहमियत किसी एक घोषणा में नहीं, बल्कि दिशा की निरंतरता में निहित है। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सरकार ने घरेलू क्षमताओं के निर्माण, नियामकीय बाधाओं को कम करने और सार्वजनिक निवेश को निजी पहल के उत्प्रेरक के रूप में उपयोग करने का मार्ग चुना है। प्राथमिकताओं के एक स्पष्ट संकेत के रूप में यह बजट भारत की अगली विकास यात्रा के लिए एक संगठित और विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत करता है।
Published on:
02 Feb 2026 04:41 pm
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