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Startup Day 2026: IIM रायपुर ने दिए सपनों को पंख, युवाओं के स्टार्टअप ने भरी ऊंची उड़ान, जानें सफलता की कहानी

Startup Day 2026: कहते हैं नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनो। यह लाइन उन युवाओं पर फिट बैठ रही है जो अपने पैशन को फॉलो करते हुए स्टार्टअप खोल रहे हैं। हर साल 16 जनवरी को स्टार्टअप डे मनाया जाता है।

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IIM रायपुर के स्टार्टअप्स की कहानी (फोटो सोर्स- AI)

IIM रायपुर के स्टार्टअप्स की कहानी (फोटो सोर्स- AI)

Startup Day 2026: कहते हैं नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनो। यह लाइन उन युवाओं पर फिट बैठ रही है जो अपने पैशन को फॉलो करते हुए स्टार्टअप खोल रहे हैं। हर साल 16 जनवरी को स्टार्टअप डे मनाया जाता है।

आज हम आपको ऐसे स्टार्टअप फाउंडर से रूबरू करवा रहे हैं जिन्हें आईआईएम रायपुर ने पंख दिए और उन्होंने ऊंची उड़ान भरी। इन युवाओं का कहना है आईआईएम के स्वावलंबन स्किल टू एंटरप्राइज मॉडल (एसटीईएम) के तहत एडवांस्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन एंटरप्रेन्योरशिप एंड न्यू वेंचर क्रिएशन का हमें काफी फायदा मिला है। इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम से हमारे स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

आईटी की जॉब छोड़ पारंपरिक कला को मॉडर्न रूप दिया

संकेत तिवारी ने आईटी सेक्टर की नौकरी छोड़कर बस्तर की पारंपरिक कला को मॉडर्न फर्नीचर से जोडऩे का निर्णय लिया। उनके स्टार्टअप ‘हाउस ऑफ बस्तर’ का उद्देश्य गोंडी और हल्बी जनजातियों की कला को आधुनिक डिजाइन और वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है।

वे बताते हैं, आईआईएम रायपुर और एनआईडी अहमदाबाद के डिजाइन एक्सपर्ट्स के सहयोग से बस्तर और कोंडागांव के गांवों में रिसर्च कर 14 विशेष फर्नीचर डिजाइन विकसित किए गए जो हाई एंड मॉडर्न होम्स के अनुरूप हैं। वर्तमान में 22 कारीगर परिवारों को नियमित रोजगार मिल रहा है। हाल ही में एक इंटीरियर एक्सपो में उनके स्टार्टअप को 110 स्टॉल में से बेस्ट स्टॉल का अवॉर्ड मिला।

क्या है एसटीईएम?

आईआईएम रायपुर और स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में एसटीईएम इन एंटरप्रेन्योरशिप एंड न्यू वेंचर क्रिएशन संचालित किया जा रहा है। यह 18 माह का सर्टिफिकेट प्रोग्राम युवाओं को बिजनेस ओनर मैनेजर के रूप में तैयार करने पर केंद्रित है। इसके जरिए 30 स्टार्टअप शुरू करने, स्थानीय रोजगार सृजन और टियर 2 और टियर 3 क्षेत्रों में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। यहां क्लासरूम ट्रेनिंग, फील्ड वर्क, मेंटरशिप, फंडिंग सपोर्ट के साथ ही स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ा जाता है।

शौक बना रेवेन्यू जनरेटिंग स्टार्टअप

अनिता साहू का स्टार्टअप बसारिया आर्टिफिशियल ज्वेलरी का है। वे देश की परंपराओं से प्रेरित डिजाइनर इंस्पायर्ड आभूषण आधुनिक लाइफस्टाइल के अनुरूप तैयार करती हैं। अनिता ने बताया, ब्रांड मुख्य रूप से चार कैटेगरी में ज्वेलरी उपलब्ध कराता है। पहली ब्राइडल ग्लैम, जिसमें प्री वेडिंग ज्वेलरी शामिल है। दूसरी एवरीडे स्पार्कल, जो ऑफिस वियर के लिए उपयुक्त आभूषणों पर आधारित है। तीसरी किड्स ज्वेलरी और चौथी देवी-देवताओं की मूर्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ज्वेलरी। अनिता कहती हैं कि जो सफर एक शौक के रूप में शुरू हुआ था, वह आज एक रेवेन्यू जनरेटिंग स्टार्टअप बन चुका है।

इंजीनियर का सस्टेनेबल पैकेजिंग स्टार्टअप

अंकित चंद्राकर का स्टार्टअप इकोफ्रेंडली कोरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में एमबीए और सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की है। उनका स्टार्टअप ई कॉमर्स, एग्रीकल्चर और एफएमसीजी सेक्टर के लिए इको फ्रेंडली पैकेजिंग समाधान उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इस वेंचर का उद्देश्य ऑटोमेटेड प्रोसेस और सस्टेनेबल मटेरियल के उपयोग से हाई क्वालिटी, कस्टमाइजेबल पैकेजिंग तैयार करना है।

अंकित का लक्ष्य स्केलेबल और सस्टेनेबल पैकेजिंग बिजनेस स्थापित करना, लोकल इंडस्ट्री को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्हें क्रॉफ्ट पेपर और कोरुगेटेड बॉक्स ट्रेडिंग का अनुभव है। वे इनोवेशन, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट इनसाइट के जरिए लॉन्ग डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं।