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मुस्कान के लिए मंज़िल आसान! 1 किमी तक ट्राईसिकल धकेलते दोस्त, जानें सच्ची दोस्ती की अनोखी कहानी…

True Friendship Story: जशपुर जिले के पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बुलड़ेगा में ऐसी ही एक अनोखी और भावुक कर देने वाली दोस्ती देखने को मिल रही है।

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मुस्कान के लिए मंज़िल आसान! 1 किमी तक ट्राईसिकल धकेलते दोस्त, जानें सच्ची दोस्ती की अनोखी कहानी...(photo-patrika)

मुस्कान के लिए मंज़िल आसान! 1 किमी तक ट्राईसिकल धकेलते दोस्त, जानें सच्ची दोस्ती की अनोखी कहानी...(photo-patrika)

True Friendship Story: सच्ची दोस्ती वही होती है जो मुश्किल समय में भी साथ निभाए। जशपुर जिले के पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बुलड़ेगा में ऐसी ही एक अनोखी और भावुक कर देने वाली दोस्ती देखने को मिल रही है, जो आज के समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

यह कहानी है कक्षा सातवीं के छात्र हेम किशोर भुईहर की, जो बचपन से पढ़ाई में होशियार रहा है, लेकिन पांचवीं कक्षा के बाद उसकी शारीरिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। समय के साथ उसके पैर कमजोर हो गए और एक समय ऐसा आया जब वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। शारीरिक अक्षमता के कारण हेम किशोर का स्कूल जाना बंद हो गया और उसका भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा।

True Friendship Story: दोस्ती और त्याग का अनोखा उदाहरण

हेम किशोर के बचपन के साथी संजय विश्वकर्मा और फिरोज सिदार ने अपने दोस्त की पढ़ाई रोकने को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने ठान लिया कि हेम की पढ़ाई कभी रुकेगी नहीं, चाहे कितना भी कठिन रास्ता क्यों न हो।

हर दिन संजय और फिरोज 1 किलोमीटर तक ट्राईसिकल धकेलकर हेम किशोर को स्कूल तक पहुंचाते हैं, जिससे उसका पढ़ाई का सिलसिला जारी रहे। इस कड़ी मेहनत और त्याग की कहानी ने पूरे गाँव को प्रेरित किया है।

छात्रों की मेहनत, दोस्ती का जज़्बा

संजय बताते हैं कि हेम उनके लिए सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि भाई जैसा है। उनका कहना है कि चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, वे कभी हेम को पढ़ाई से दूर नहीं जाने देंगे। वहीं फिरोज कहते हैं कि जब दोस्त के सपने अधूरे रह जाते हैं, तो वे चैन से कैसे बैठ सकते हैं।

उन्हें ट्राईसिकल धकेलना कठिन लगता है, लेकिन हेम की मुस्कान सभी मुश्किलें भूलवा देती है। हेम किशोर भी अपने दोस्तों की इस निस्वार्थ मदद से बेहद खुश और प्रेरित महसूस करता है। उनका कहना है कि संजय और फिरोज के बिना वह स्कूल नहीं आ पाता, और उनका साथ उनके लिए सबसे बड़ा वरदान है।

समाज के लिए संदेश

यह कहानी सिर्फ तीन दोस्तों की नहीं है, बल्कि सच्ची दोस्ती, त्याग और सहयोग का संदेश है। यह दिखाती है कि जब दोस्ती में प्रेम और निस्वार्थ भावना हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। जशपुर की यह मिसाल समाज के लिए प्रेरणा है कि सच्चा मित्र वही जो मुश्किल में साथ खड़ा हो और दोस्त के सपनों को सच करने में मदद करे।