
Photo- Dinesh Dabi
Jaipur Army Parade: जयपुर में जब हजारों जवानों के कदम एक साथ जमीन पर पड़े तो देशभक्ति की गूंज भर उठी। मौका था सेना दिवस पर भारतीय सेना की एतिहासिक परेड का।
खास बात यह है कि 78 वर्षों में पहली बार सेना दिवस की मुख्य परेड आर्मी कैंट से बाहर आमजन के बीच आयोजित की गई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी का चेहरा गर्व से दमकता दिखा।
सैन्य पराक्रम की परेड ने धोरों की धरा की राजधानी जयपुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दी। यह आयोजन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक रहा।
परेड में भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाकर पड़ोसी देश पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को संदेश दिया की भारत से जो भी टकराएगा वो चूर-चूर हो जाएगा।
परेड के दौरान भारतीय सेना ने अपनी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और युद्धक टुकड़ियों का प्रदर्शन करते हुए जगुआर फाइटर जेट, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, टैंक, रोबोटिक डॉग्स, एयर डिफेंस सिस्टम तथा भैरव बटालियन को प्रस्तुत किया, जो कि भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी तकनीक और हर परिस्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को दर्शाता है।
सेना दिवस परेड में भारतीय वायुसेना की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पाक सीमा से लगभग 150 किलोमीटर दूरी पर स्थित बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर 3 जगुआर फाइटर जेट ने परेड स्थल पर हवाई पास्ट किया।
इसके साथ ही अपाचे, प्रचंड और ध्रुव हेलिकॉप्टरों ने परेड के ऊपर से उड़ान भरते हुए पुष्पवर्षा की, जिससे समारोह और अधिक गरिमामय बन गया।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर अजीत सिंह ने कहा कि भारतीय सेना दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सक्षम है। जयपुर में हुई परेड में भैरव बटालियन मेरे लिए बड़ा आकर्षण रही।
जिस तरह से बटालियन ने अपनी गति, अनुशासन और कौशल दिखाया, वो हम सभी के लिए गर्व की बात है। यहां मैंने जो तकनीक का प्रदर्शन देखा, वह अद्भुत है।
उन्होंने कहा कि आज की भारतीय सेना सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक की ताकत से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में पूरी तरह सक्षम है। यह परेड साफ संदेश देती है कि हमारी सेना भविष्य की हर चुनौती के लिए तैयार है।
सेना में हवलदार पद से सेवानिवृत्त अमरसिंह ने बताया कि रात का समय एक सैनिक के लिए सबसे भावनात्मक होता है। मोबाइल कॉल का सीमित वक्त मिलता है।
कोई अपने बच्चों की आवाज सुनता है, कोई माता-पिता से हालचाल पूछता है, तो कोई पत्नी से बस इतना कहता है कि मैं वापस आऊंगा।
कई बार कॉल खत्म होते ही आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन अगली सुबह फिर वही अनुशासन, वही वर्दी और वही लक्ष्य सामने होता है।
परेड देखने पहुंचे अनंत ने कहा कि पहली बार इतने करीब से सेना की ताकत और आधुनिक हथियार देखे। जब मिसाइलें और सैन्य वाहन गुजरे तो लगा कि हमारा देश कितने मजबूत और सुरक्षित हाथों में है।
अर्चना गर्ग ने कहा कि जयपुर में आमजन के बीच परेड होने से सेना और जनता की दूरी कम होती नजर आई। इसलिए ऐसे कार्यक्रम होते रहना चाहिए। बच्चों और युवाओं में जो जोश और गर्व दिखा, वही इस आयोजन की असली सफलता है।
सेना दिवस परेड खत्म होने के बाद जयपुर में मीडिया से बातचीत में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रही है। भैरव बटालियन और शक्तिबाण जैसी नई रेजिमेंट को युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
परेड के लिए जयपुर को ही क्यों चुना गया? इस सवाल के जवाब में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि राजस्थान वह भूमि है जहां कई वीरों ने इतिहास रचा है, इसलिए सेना दिवस परेड के लिए इस जगह को चुना गया।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है। अब हम वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की जंगों के लिए भी तैयार हो रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सेना के लिए एक नया मानक स्थापित किया। ऑपरेशन ने यह साबित किया कि सेना तेजी, समन्वय और सटीकता के साथ जवाब देने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर समय किसी भी प्रकार के हमले के लिए तैयार है। परेड के माध्यम से हमने इस तैयारी को प्रदर्शित किया है और आने वाले दिनों में यह तैयारी और मजबूत होगी।
सेना प्रमुख ने कहा कि परेड में प्रदर्शित मेड इन इंडिया उपकरण सेना के परिवर्तन की मजबूत नींव को दर्शाते हैं। भविष्य में भारतीय सेना को ऐसे हथियार और उपकरण चाहिए जो भारत में ही डिजाइन और विकसित किए गए हों।
जयपुर में आयोजित परेड को गणमान्य नागरिकों के अलावा करीब डेढ़ लाख लोगों ने देखा। हर गुजरते दस्ते के साथ लोग गर्व से मोबाइल कैमरों में इन ऐतिहासिक पलों को कैद करते और उनके साथ सेल्फी लेते हुए नजर आए।
जयपुर में सेना के शौर्य संध्या कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक आतंक की सोच खत्म नहीं होती है, तब तक शांति के लिए हमारा प्रयास चलता रहेगा।
अन्य रैंक
दक्षिण पश्चिमी कमान भारतीय सेना की सबसे युवा कमांड है। इसका औपचारिक गठन 15 अप्रैल 2005 को हुआ। इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है। 15 अगस्त 2005 से यह जयपुर गॉथिक लाइन्स क्षेत्र से सक्रिय हुई।
इसका उपनाम सप्त शक्ति कमान है। इस कमान में 1 कोर, 10 कोर और 61 सब एरिया शामिल हैं। यह कमांड मुख्य रूप से राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
इसका प्रमुख उद्देश्य पश्चिमी मोर्चे पर सैन्य परिचालनों की गति और प्रभावशीलता बढ़ाना है।
61 कैवेलरी रेजिमेंट 73 वर्ष पुरानी और भारतीय सेना की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है। इसका मुख्यालय भी जयपुर में स्थित है। यह दुनिया की आखिरी बची हुई सक्रिय घुड़सवार इकाइयों में से एक है।
यह गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रपति को सलामी देती है। इस रेजिमेंट ने अंतिम घुड़सवार चार्ज हाइफा की लड़ाई (1918) में भाग लिया था।
इसका गठन पोलो और इक्वेस्ट्रियन स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था। यह अब तक 11 अर्जुन अवॉर्ड और 10 एशियन गेम्स पदक जीत चुकी है।
वर्ष 2014–15 में सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की संख्या लगभग 3 हजार थी। वर्ष 2024–25 में यह संख्या बढ़कर 11 हजार हो गई है। महिलाएं तीनों सेनाओं में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रही हैं।
वर्ष 2022 में एनडीए में महिलाओं का प्रवेश शुरू हुआ। वर्ष 2021 से सेना विमानन कोर में महिला अधिकारी पायलट के रूप में देशसेवा कर रही हैं। वर्ष 2019 से महिलाओं की भर्ती मिलिट्री पुलिस में शुरू हुई।
Updated on:
16 Jan 2026 06:51 pm
Published on:
16 Jan 2026 06:46 pm
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