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जयपुर : 30 भट्टियां… 450 हलवाई ने तैयार की 800 क्विंटल प्रसादी, खोले के हनुमान मंदिर में 65वां लक्खी अन्नकूट, देखें तस्वीरें

Khole Ke Hanuman Ji Temple Jaipur: जयपुर के देवालयों में अन्नकूट महोत्सव की धूम है। खोले के हनुमानजी मंदिर में साल 2017 में यहां 1.25 लाख भक्तों के अनुशासित प्रसादी ग्रहण का रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। अब इस वर्ष फिर एक नया कीर्तिमान बनने की उम्मीद है।

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जयपुर स्थित खोले के हनुमान जी मंदिर में आज विशाल अन्नकूट महोत्सव का आयोजन हो रहा है। मंदिर परिसर में आज दोपहर से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की विशाल पंगत सजेगी। करीब दो लाख श्रद्धालु आने की संभावना जताई गई है

जयपुर स्थित खोले के हनुमान जी मंदिर में आज विशाल अन्नकूट महोत्सव का आयोजन हो रहा है। मंदिर परिसर में आज दोपहर से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की विशाल पंगत सजेगी। करीब दो लाख श्रद्धालु आने की संभावना जताई गई है

मंदिर प्रशासन के अनुसार मंदिर में आज 65वां अन्नकूट कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हनुमान जी को 30 किलो चांदी की पोशाक धारण करवाई गई। दोपहर 12:15 बजे महाआरती के बाद हनुमानजी को 800 क्विंटल छप्पन भोग और अन्नकूट प्रसाद का भोग लगाया गया।

मंदिर प्रशासन के अनुसार मंदिर में आज 65वां अन्नकूट कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हनुमान जी को 30 किलो चांदी की पोशाक धारण करवाई गई। दोपहर 12:15 बजे महाआरती के बाद हनुमानजी को 800 क्विंटल छप्पन भोग और अन्नकूट प्रसाद का भोग लगाया गया।

अन्नकूट प्रसादी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के करीब 450 हलवाई जुटे हुए हैं। प्रसादी बनाने के लिए 30 विशाल भट्टियां स्थापित की गई हैं, जो सुबह से लगातार चल रही हैं। 1000 वॉलंटियर व्यवस्था को संभालने में लगे हैं।

अन्नकूट प्रसादी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के करीब 450 हलवाई जुटे हुए हैं। प्रसादी बनाने के लिए 30 विशाल भट्टियां स्थापित की गई हैं, जो सुबह से लगातार चल रही हैं। 1000 वॉलंटियर व्यवस्था को संभालने में लगे हैं।

खोले के हनुमान जी मंदिर में अन्नकूट कार्यक्रम का इतिहास भी बेहद रोचक है। यह परंपरा वर्ष 1971 में मात्र 5 किलो अन्न से शुरू हुई थी, जो अब बढ़कर 250 क्विंटल तक पहुंच गई है। आज यह आयोजन न केवल जयपुर बल्कि पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक अन्नकूट महोत्सव बन गया है।

खोले के हनुमान जी मंदिर में अन्नकूट कार्यक्रम का इतिहास भी बेहद रोचक है। यह परंपरा वर्ष 1971 में मात्र 5 किलो अन्न से शुरू हुई थी, जो अब बढ़कर 250 क्विंटल तक पहुंच गई है। आज यह आयोजन न केवल जयपुर बल्कि पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक अन्नकूट महोत्सव बन गया है।

श्री नरवर आश्रम सेवा समिति (प्रन्यास) के अध्यक्ष गिरधारी लाल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम ब्रह्मलीन बाबा राधेलाल जी चौबे की परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। सभी भक्त, चाहे आमजन हों या अधिकारी, एक ही पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण करेंगे।

श्री नरवर आश्रम सेवा समिति (प्रन्यास) के अध्यक्ष गिरधारी लाल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम ब्रह्मलीन बाबा राधेलाल जी चौबे की परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। सभी भक्त, चाहे आमजन हों या अधिकारी, एक ही पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण करेंगे।