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chhath puja : जयपुर में भोर से दिखी श्रद्धा की लहर, व्रतियों ने उगते सूर्यदेव को दिया अर्घ्य, देखें Photos

Chhath Puja 2025 : नई नवेली व्रतियों ने इस अवसर पर कोशिया भरने की रस्म निभाई। घरों में उत्सव का माहौल रहा और सभी ने मिलकर प्रसाद ग्रहण कर पर्व का पारणा किया।

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लोक आस्था के चार दिवसीय पर्व डाला छठ का मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ समापन हुआ। राजधानी जयपुर के प्रमुख तीर्थ गलताजी में अलसुबह से ही श्रद्धालु उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ पड़े।

लोक आस्था के चार दिवसीय पर्व डाला छठ का मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ समापन हुआ। राजधानी जयपुर के प्रमुख तीर्थ गलताजी में अलसुबह से ही श्रद्धालु उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ पड़े।

भोजपुरी गीतों की गूंज और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ व्रतियों ने परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। छठ महापर्व के दौरान घाट भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे।

भोजपुरी गीतों की गूंज और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ व्रतियों ने परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। छठ महापर्व के दौरान घाट भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे।

गलता तीर्थ परिसर में सोमवार रात से ही मेले जैसा माहौल रहा। बड़ी संख्या में बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के समाजजन परिवार सहित पहुंचे। महिलाओं ने छठी मैया के गीत गाते हुए पूरी रात जागरण किया।

गलता तीर्थ परिसर में सोमवार रात से ही मेले जैसा माहौल रहा। बड़ी संख्या में बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के समाजजन परिवार सहित पहुंचे। महिलाओं ने छठी मैया के गीत गाते हुए पूरी रात जागरण किया।


भोर फटने के साथ ही महिलाओं ने कमर तक पानी में खड़े होकर सूप में अर्घ्य चढ़ाया। शास्त्री नगर, कानोता बांध, आमेर मावठा, मुरलीपुरा, विश्वकर्मा, प्रताप नगर सहित जयपुर के कई इलाकों में छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया।

भोर फटने के साथ ही महिलाओं ने कमर तक पानी में खड़े होकर सूप में अर्घ्य चढ़ाया। शास्त्री नगर, कानोता बांध, आमेर मावठा, मुरलीपुरा, विश्वकर्मा, प्रताप नगर सहित जयपुर के कई इलाकों में छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया।

अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने 'करिहा क्षमा छठी मैया, भूल चूक गलती हमार…' और 'कांचहिं बांस के बहंगिया…' जैसे पारंपरिक गीत गाए। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया गया।

अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने 'करिहा क्षमा छठी मैया, भूल चूक गलती हमार…' और 'कांचहिं बांस के बहंगिया…' जैसे पारंपरिक गीत गाए। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया गया।