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निजी स्कूलों का अधिकार खत्म! पहली से चौथी, 6वीं-7वीं, 9वीं–11वीं की परीक्षाएं कराएंगे DEO, नए आदेश का विरोध

CG School Exam: निजी स्कूलों से इन कक्षाओं की परीक्षा लेने का अधिकार छीन लिया गया है। आदेश के विरोध में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है

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CG School Exam

स्कूल में परीक्षा देते छात्र (hoto Patrika)

अनुराग सिंह. लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने ( CG School Exam) प्रदेशभर के निजी स्कूलों में पहली से चौथी, छठी- सातवीं तथा नवमी–ग्यारहवीं कक्षाओं की वार्षिक परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को सौंप दी है। इस आदेश के साथ ही निजी स्कूलों से इन कक्षाओं की परीक्षा लेने का अधिकार छीन लिया गया है। आदेश के विरोध में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है।

CG School Exam: निजी स्कूल संचालकों में असंतोष

गौरतलब है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं पहले से ही माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जाती हैं। अब शेष कक्षाओं की परीक्षाएं भी जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कराए जाने का निर्णय लिया गया है, जिसे लेकर निजी स्कूल संचालकों में असंतोष व्याप्त है। एसोसिएशन ने बुधवार को लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने की मांग की है। आदेश के अनुसार, परीक्षाएं 25 मार्च से 10 अप्रैल के बीच आयोजित की जाएंगी।

यह आदेश नियमों के विरुद्ध : एसोसिएशन

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) में इस प्रकार की परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि मान्यता नियमों में भी इन कक्षाओं में इस तरह की परीक्षा आयोजित कराने का प्रावधान नहीं है, ऐसे में यह आदेश नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल कई ऐसे विषय पढ़ाते हैं, जिनकी परीक्षा वे स्वयं लेते हैं, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग उन सभी विषयों की परीक्षा नहीं कराता। ऐसे विषयों के मूल्यांकन को लेकर आदेश में कोई स्पष्टता नहीं है। बोर्ड परीक्षाओं के अलावा अन्य परीक्षाओं में निजी स्कूलों की स्वायत्तता समाप्त करना शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

मानसिक दबाव डालने वाला निर्णय

एसोसिएशन का कहना है कि सत्र के अंतिम महीने में परीक्षाओं की घोषणा करना विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालने वाला निर्णय है। साथ ही, एक महीने के भीतर विभाग द्वारा लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित कर पाना व्यावहारिक रूप से कठिन है। आदेश के अनुसार जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाना है, लेकिन अब तक किसी भी जिले में ऐसी समिति का गठन नहीं किया गया है।

30 अप्रैल तक घोषित होंगे नतीजे

डीपीआई के आदेश के अनुसार, वार्षिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। विषय शिक्षक द्वारा मूल्यांकन का कार्य 20 अप्रैल तक पूरा करना होगा। विद्यालयवार अंकसूचियां 25 अप्रैल तक तैयार की जाएंगी और परीक्षा परिणाम 30 अप्रैल तक घोषित किए जाएंगे।

पहली से चौथी तथा छठी–सातवीं कक्षाओं में त्रैमासिक परीक्षा के प्रत्येक विषय में प्राप्त अंकों का 20 प्रतिशत और छमाही परीक्षा के अंकों का 20 प्रतिशत अधिभार जोड़ा जाएगा, जबकि वार्षिक परीक्षा का 60 प्रतिशत अंक जोड़कर अंतिम परीक्षाफल तैयार किया जाएगा। नवमी और ग्यारहवीं कक्षा में छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत अंक अधिभार के रूप में जोड़े जाएंगे।

फेल होने पर अगली कक्षा में प्रवेश

डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी वार्षिक परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो उसे पूरक परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएगा। अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए विषय शिक्षकों द्वारा अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी। पहली से चौथी तथा छठी–सातवीं कक्षाओं में यदि कोई विद्यार्थी पूरक परीक्षा में भी अनुत्तीर्ण होता है, तो उसे भी कक्षोन्नति देकर अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। किसी भी विद्यार्थी को पिछली कक्षा में रोका नहीं जाएगा।