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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी 2026: 13 फरवरी को व्रत, पूजा विधि, महत्व और लाभ

Vijaya Ekadashi 2026 :"विजया एकादशी 2026: क्या आप शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता चाहते हैं? जानें 13 फरवरी का शुभ मुहूर्त, भगवान विष्णु की विशेष पूजा विधि और श्री राम से जुड़ी पौराणिक कथा। सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं ये अचूक ज्योतिषीय उपाय।

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Vijaya Ekadashi 2026

Vijaya Ekadashi 2026 : विजया एकादशी स्पेशल: पीली चीजों का दान और 'अच्युतम केशवम' का जाप, मिटाएगा जीवन के सारे रोग-शोक (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Vijaya Ekadashi 2026 : हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और पीली चीजों का दान करना शुभ होता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती हैं। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि विजया एकादशी का व्रत हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है।

शास्त्रों में एकादशी व्रत को सर्वोत्तम माना गया है। क्योंकि, यह इकलौता ऐसा व्रत है जिसका पुण्य आप किसी दूसरे व्यक्ति को भी दान कर सकते हैं। साथ ही इस व्रत को करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने और भगवान के मंत्रों का जप करने से जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर होती हैं। साथ ही सफलता का रास्ता आसान हो जाता है।

Vijaya Ekadashi 2026 : भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी व्रत

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, लेकिन इसका महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब यह फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष में पड़ती है और विजया एकादशी कहलाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार श्री हरि की कृपा बरसाने वाले इस व्रत को विधि-विधान करने से साधक के जीवन से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं और वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है।

Vijaya Ekadashi का व्रत फाल्गुन मास की एकादशी तिथि को किया जाता है

विजया एकादशी का व्रत करने वालों को शत्रुओं पर सफलता प्राप्त होती है। साथ ही तरक्की में आ रही बाधाएं भी दूर होती है। साल भर में पड़ने वाली 24 एकादशी तिथि में विजया एकादशी का व्रत का अत्यधिक महत्व इसलिए माना गया है क्योंकि इस व्रत को भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले किया था। मान्यता है कि इस व्रत को करने साधक के जीवन से जुड़े सभी रोग-शोक दूर होते हैं और वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। विजया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी के मामले में जीत हासिल होती है।.

विजया एकादशी तिथि | Vijaya Ekadashi Date

विजया एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी को दोपहर में 12:33 मिनट पर आरंभ होगी और 13 तारीख को 2:26 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रीय विधान के अनुसार, 13 फरवरी को ही विजया एकादशी का व्रत किया जाएगा। बता दें कि जब भी एकादशी तिथि सूर्योदय के समय लगती है तब विजया एकादशी का व्रत किया जाता है। इसलिए विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को ही करना शास्त्र सम्मत है।

विजया एकादशी व्रत का महत्व

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत भगवान राम ने भी किया था। जब भगवान राम लंका के रास्ते पर थे उस समय समुद्र के तट पर अपनी सेना के साथ मिलकर भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत किया था। तभी से इस एकादशी का नाम विजया एकादशी पड़ा।

विजया एकादशी पूजा विधि | | Vijaya Ekadashi Puja Vidhi

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि विजया एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु को चंदन लगाएं और वस्त्र अर्पित करें। अब भगवान को पीले रंग की चीजों का भोग लगाएं उन्हें पीली मिठाई और गुड़ चने का भोग लगाए। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करें। विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और फिर आरती करें। अंत में सभी को प्रसाद दें।

भगवान विष्णु के मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

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