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ग्यारह वर्ष बाद भी आंगनबाड़ी भवन अधूरे, अतिरिक्त कक्ष, पंचायत और किराए के भवनों में हो रहा संचालन

बीना. नौनीहालों को अच्छी सुविधाएं मिलें इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत हुए थे। यह भवन अलग-अलग वर्ष में स्वीकृत हुए हैं, जिसमें सिर्फ एक भवन ही बन पाया है। 8 भवन तो ऐसे हैं, जिनका कार्य भी शुरू नहीं हुआ है। महिला बाल विकास के अधिकारी बार-बार पंचायत को पत्र भेज रहे […]

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बीना. नौनीहालों को अच्छी सुविधाएं मिलें इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत हुए थे। यह भवन अलग-अलग वर्ष में स्वीकृत हुए हैं, जिसमें सिर्फ एक भवन ही बन पाया है। 8 भवन तो ऐसे हैं, जिनका कार्य भी शुरू नहीं हुआ है। महिला बाल विकास के अधिकारी बार-बार पंचायत को पत्र भेज रहे हैं, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
महिला बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 35 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण होना है, जिसमें वर्ष 2104, 2018, 2021 और 2022 में स्वीकृति मिली थी। स्वीकृति के बाद अभी तक सिर्फ एक मुडिया नायक का भवन तैयार हुआ है। आठ भवनों का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है, जिसमें कहीं जगह नहीं मिल पा रही है, तो कहीं पूर्व में सरपंच द्वारा राशि निकालने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। भवन न होने से आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन पंचायत भवन, स्कूल के अतिरिक्त कक्ष, सामुदायिक भवन सहित 19 किराए के मकानों में हो रहा है, जिससे कई जगह सुविधाएं भी नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कुल 170 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। स्वीकृत भवनों का निर्माण जनपद पंचायत के माध्यम से ग्राम पंचायतों को करना है। बैठकों में हर बार यह जानकारी वरिष्ठ अधिकारी लेते हैं और निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन फिर भी कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है।

शहर में सिर्फ एक आंगनबाड़ी भवन
शहर में 58 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन शासकीय भवन सिर्फ एक ही है। शेष केन्द्र किराए के मकान में संचालित हो रहे हैं। छोटे-छोटे कमरों में चल रहे केन्द्रों में अच्छे से बैठने की सुविधाएं भी नहीं है। शहर में भी शासकीय जमीन न होने से केन्द्र बनाने में परेशानी आ रही है।

लगातार किया जा रहा पत्राचार
आंगनबाड़ी भवन तैयार कराने लगातार जनपद पंचायत सीइओ से पत्राचार किया जा रहा है। कई जगह जमीन न मिलने से भी काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
छाया नागर, परियोजना अधिकारी, महिला बाल विकास, ग्रामीण