
रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण शनिवार को सात दिवसीय धार्मिक आयोजन का शुभारंभ श्रीराम कथा से हो गया। रविवार को दक्षिणमुखी हनुमान की प्राण प्रतिष्ठा होगी। कथा वाचक प्रेमभूषण ने कहा कि मंदिर में दक्षिणमुखी हनुमान की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाएगी और स्वयं हनुमान जी कथा श्रवण के लिए प्रांगण में विराजमान रहेंगे।
कथा के पहले दिन शनिवार को उन्होंने कहा कि रामचरित मानस का प्रारंभ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग से शुरू होता है। इसके पीछे भी यह सबसे बड़ा कारण है कि भगवान शिव विश्वास के प्रतीक हैं और माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। जिस मनुष्य में श्रद्धा और विश्वास का भाव उपस्थित होगा वही रामचरितमानस में गोता लगाकर भगवान का दर्शन प्राप्त कर सकेगा।
कथावाचक ने कहा कि हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है। जो ईष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठा रहे। सुग्रीवजी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में लिपट कर भगवान को ही भूल गए। हम जिस युग में जी रहे हैं वहां कोई भी मनुष्य विकारों से दूर नहीं रह पाता है। इससे मनुष्य का जीवन कष्टमय हो जाता है। अगर हम सहज रहना चाहते हैं, सहज जीना चाहते हैं तो हमारे पास इस कलियुग के मैल को काटने और धोने का एकमात्र साधन श्री राम कथा है।
हमारे घर में जीवित माता-पिता हैं तो वही हमारे भगवान हैं। उनकी सेवा से वह सब प्राप्त कर सकते हैं जो भगवान से चाहते हैं। रामचरितमानस में बताया है कि माता-पिता की आज्ञा मानने वाले, गुरु और अपने से बड़ों की आज्ञा मानने वाले सदा ही सुखी रहते हैं।
धरती पर तीन प्रकार के लोग होते हैं। एक तो अपने प्रारब्ध के कारण सब कुछ जानने के कारण उचित कार्य ही करते हैं, दूसरे वह है जो दूसरों के अच्छे कार्य को देखकर समझ के कार्य करते हैं। तीसरे वह हैं जो गलत करते हैं भुगतते हैं और तब उससे सीखते हैं। हमें तीसरा मार्ग अपनाने से बचना चाहिए।
छल प्रपंच से धन तो अर्जित किया जा सकता है लेकिन उसे सुख की प्राप्ति संभव नहीं है। अधर्म के पथ पर चलकर धन अर्जित करने वाले जीवन में कभी भी सुखी नहीं हो सकते हैं। दूसरों को वह दूर से सुखी तो दिखते हैं, लेकिन उनके हृदय का हाल जाना जाए तो पता चलता है कि उनके दुख की कोई सीमा नहीं है।
जब मनुष्य धर्म कार्यों में पूजा पाठ में संलग्न हो जाता है तो उसके जीवन से भय, विशेषत: मृत्यु का भय बिल्कुल समाप्त हो जाता है क्योंकि तब वह धीरे-धीरे ईश्वर के निकट पहुंचने लगता है। जो व्यक्ति भगवान से संबंध स्थापित कर लेता है, उसे इस संसार की किसी भी चीज से दुख नहीं पहुंचता।
पूर्व गृहमंत्री खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि जब तक भारत में रामकथा जीवित है, तब तक भारतीय संस्कृति सुरक्षित है। रामकथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो पीढि़यों को जोड़ती है, ‘राष्ट्र चरित्र‘ का आधार है। कथा सुनने से हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है। इस अवसर पर पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी, एड. कृष्णवीर सिंह, प्रभु दयाल पटेल, पूर्व महापौर मनोरमा गौर, अनुराग प्यासी, सेवानिवृत्त डीएसपी वीरेन्द्र बहादुर सिंह, जिला क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष लखन सिंह आदि उपस्थित रहे।
Published on:
01 Feb 2026 05:25 pm
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