
स्कूल भवन की जर्जर छत
बीना. जर्जर स्कूलों में आए दिन कहीं न कहीं हादसे हो रहे हैं, लेकिन फिर भी जिम्मेदार अधिकारी प्रस्ताव बनाने तक ही सीमित हैं। लापरवाही के चलते बच्चों के सिर पर हमेशा खतरा मंडराता रहा है। कई जगहों पर पूर्व में छत, दीवार गिरने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
जानकारी के अनुसार ब्लॉक में 19 शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के भवन अति जर्जर हैं। यह वह भवन हैं, जो विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं और मरम्मत के लिए प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा अधिकांश शासकीय स्कूल भवनों में मरम्मत की जरूरत है, लेकिन फिर भी बजट नहीं मिल रहा है। कहीं भवन की छत गिर रही हैं, तो कहीं दीवारों में दरारें आने से गिरने की कगार पर हैं और फिर भी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बारिश के मौसम में इन भवनों में बैठने के लिए भी जगह नहीं बचती है। पूर्व में छत, दीवार गिरने जैसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन फिर भी जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नहीं हैं और भवनों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। कई बार प्रस्ताव देने के बाद सिर्फ दो भवनों की मरम्मत के लिए दो-दो लाख रुपए आए थे, जिससे मरम्मत करा दी गई है। इसके अलावा किसी भवन के लिए बजट नहीं आया है।
ब्लॉक के अति जर्जर भवन
शिक्षा विभाग द्वारा बनाए गए प्रस्तावों में प्राथमिक स्कूल दौलतपुर, रामनगर, चिकनौटा, मालखेड़ी, गुनगी टोला, कलरावनी, बलारखेड़ी, रुसल्ला, धरमपुर, पहलेजपुर, मेवली, निवोदिया, विंधई, कजरई, हडक़ल जैन, करमपुर, पुराजादव, बाहरी इटावा, बेथनी शामिल है। शहर के भी कुछ स्कूल जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। रामनगर, दौलतपुर, हडक़ल जैन में दूसरे भवनों में कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं।
भेज चुके हैं प्रस्ताव
जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए चार बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। दो स्कूलों के लिए राशि आने पर मरम्मत करा दी गई है। अन्य भवनों का बजट आने पर मरम्मत कराई जाएगी।
महेन्द्र सिंह, बीआरसीसी, बीना
Published on:
31 Jan 2026 12:11 pm
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