
शहडोल. विकास के दावों के बीच शहर की सब्जी मंडी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के कारण खंडहर में तब्दील हो चुकी है। तीन दशक पहले जिस मंसूबे के साथ लाखोंं की लागत से मंडी का ढांचा खड़ा किया गया था, वह आज रसूखदारों के निजी स्टैंड और अवैध कब्जों का अड्डा बन चुका है। आलम यह है कि 12 हजार वर्ग फीट का शासकीय शेड अब खंडहर बनकर गिर रहा है और सब्जी का कारोबार मुय सडक़ों पर सिमट आया है। नगर पालिका और राजस्व विभाग के नियम धरातल पर दम तोड़ रहे हैं, जिससे न केवल शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि आम जनता को भी रोज जाम व विवाद का सामना करना पड़ रहा है।
सब्जी की दुकानें सडक़ पर, शेड में ठेलों का कब्जा
मंडी परिसर के भीतर 1992 में नगरपालिका की तरफ से 12 हजार स्क्वायर फीट में बने विशाल शेड का हाल यह है कि यहां सब्जी की दुकानें लगने के बजाय खाली ठेले व व्यापारियों के वाहन खड़े किए जा रहे हैं। नगरपालिका के पूर्व अधिकारियों के अनुसार, शेड के अंदर एक दुकानदार को 36 स्क्वायर फीट का भूखंड दिया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि आज यहां महज 4 से 6 दुकानदार ही अपनी दुकानें लगा रहे हैं। बाकी का पूरा हिस्सा या तो कचरे से पटा है या व्यापारियों ने उसे निजी गोदाम की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
3 एकड़ से घटकर 2 एकड़ से भी कम बची मंडी
नगरपालिका के रिटार्यड अधिकारी की मानें तो करीब 34 साल पहले यह सब्जी मंडी 3 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला करती थी। लेकिन वर्तमान में यह सिमटकर 2 एकड़ से भी कम रह गई है। व्यापारियों ने न केवल शेड पर कब्जा किया, बल्कि खुले स्थानों पर भी अस्थाई निर्माण कर उसे अपनी जागीर बना ली है। शहर की बढ़ती आबादी के साथ यहां हर साल औसतन 10 प्रतिशत नये सब्जी दुकानदार बढ़ रहे हैं। जगह कम होने और पुराने अतिक्रमण न हटने के कारण अब यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।
हर दिन निकलता है 2 टन से अधिक कचरा
सब्जी में अतिक्रमण व भीड़ के कारण अब सफाई करना भी अब मुश्किला हो रहा है, सब्जी मंडी से ही हर दिन 2 टन यानी 3 से 4 ट्राली कचरा कचरा निकलता है। नगरपालिका के कर्मचारियों की माने तो पूरे शहर में सबसे अधिक कचरा यहीं होता है, एक दिन सफाई न होने पर दुर्गन्ध उठने लगती है, जिससे आसपास के रहवासियों को समस्या होने लगती है।
वर्जन
शहर की बढ़ती आबादी के अनुसार मंडी अब छोटी पडऩे लगी है। वर्तमान में दुकानों की संया कितनी है इसका रिकार्ड देखना पड़ेगा, शेड का अंतिम बार मरात कब हुआ इसकी जानकारी नहीं है।
मयंक मिश्रा, राजस्व निरीक्षक नगरपालिका
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सब्जी मंडी के अंदर व्यापारी अपनी दुकान नहीं लगाते हैं, जिसके कारण सडक़ों पर कचरा अधिक होता है। यहां से हर दिन 2 टन कचरा निकलता है, अधिकांश स्थानों पर अतिक्रमण के कारण सफाई करना भी मुश्किल है।
अनिल महोबिया, स्वच्छता निरीक्षक नगरपालिका
Published on:
08 Feb 2026 07:45 pm
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