
Kisan
सीकर.
कृषि कानूनों की वापसी के बाद प्रदेश के ५५ लाख किसानों को 1,20,979 करोड़ की कर्जामाफी का इंतजार है। पिछले विधानसभा चुनाव के समय सबसे बड़े सियासी मुद्दे के तौर पर उछले कर्जामाफी की आस किसानों की अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद दस दिन में कर्जामाफी करने का वादा किया था। इसके लिए सहकारिता विभाग की ओर से 19 दिसम्बर 2018 को आदेश भी जारी कर दिया गया। लेकिन यह आदेश अभी तक कागजों में उलझा हुआ है। दरअसल, पहले भाजपा और फिर कांग्रेस की सरकार की ओर से सहकारी बैंकों का कर्जा तो माफ किया गया। लेकिन राष्ट्रीयकृत व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लोन लेने वाले किसानों को अभी तक पूरी राहत का इंतजार है। सरकार के तीन वर्ष होने पर कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि जनघोषणा पत्र के 87 फीसदी दावे पूरे कर लिए गए है। लेकिन अभी भी बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश का किसान कर्जे से कब मुक्त होगा।
राज्य सरकार का दावा:
सरकार के तीन साल पर जन घोषणा पत्र को लेकर जारी पुस्तक में कर्जामाफी का भी जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया कि प्रदेश के २०.७१ लाख किसानों के ७८१३ करोड़ रुपए के सहकारी अल्पकालीन फसली लोन माफ किए गए। वहीं ३१, ८१४ सीमांत व लघु किसानों के ३५९ करोड़ रुपए के सहकारी मध्यकालीन व दीर्घकालीन कृषि ऋण माफ किए गए है। सरकार की ओर से अन्य बैंकों को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया है।
कर्जामाफी को लेकर केन्द्र की रिपोर्ट...
केंद्र सरकार के आंकड़ों के हिसाब से राजस्थान के किसानों पर 31 मार्च 2021 तक 1,20,979 करोड़ कर्ज बाकी था।
कांग्रेस ने किसानों को ठगने का काम किया: भाजपा
विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने किसानों से झूठे वादे कर सत्ता हासिल कर ली। कांग्रेस नेताओं ने दस दिन में कर्जामाफ करने का वादा किया। लेकिन सरकार के तीन साल पूरे होने पर भी किसानों को कर्जामाफी का इंतजार है। प्रदेश का किसान सरकार को वक्त आने पर करारा जवाब देगा।
हरिराम रणवां, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा, किसान मोर्चा
90 फीसदी किसान कर्जदार, सरकार को सबक सिखाना भी आता है: माकपा
प्रदेश का 90 फीसदी किसान कर्जे में डूबा हुआ है। सबसे महंगी बिजली राजस्थान में दी जा रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने भी रेकार्ड तोड़ दिए है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की नीतियों में कोई अंतर नहीं है। कृषि कानूनों को लेकर देश के किसानों को किस तरह से सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा यह सभी ने देखा। पिछली सरकार के समय सीकर की धरती से ही किसानों का आंदोलन हुआ तब जाकर आठ हजार करोड़ का कर्जा माफ हुआ है। अब सरकार ने शेष कर्जामाफ नहीं किया तो किसानों को सरकार को सबक सिखाना भी आता है।
अमराराम, पूर्व विधायक, माकपा
आठ हजार करोड़ का कर्जा माफ किया है: कांग्रेस
प्रदेश के किसानों का आठ हजार करोड़ का कर्जामाफ किया है। सरकार ने दस दिन में कर्जामाफ करने की घोषणा की थी। इस वादे को निभाते हुए सरकार ने 19 दिसम्बर 2018 को ही आदेश जारी कर दिए थे। किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है।
सुनीता गिठाला, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
2017 में सीकर से शुरू हुआ कर्जामाफी का आंदोलन
कर्जामाफी की मांग को लेकर प्रदेश में वर्ष 2017 में माकपा के बैनरतले अभियान शुरू किया। किसानों ने तीन दिन हाइवे को जाम रखा। किसान नेताओं की वार्ता के बाद सरकार ने कर्जामाफी की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने कर्जामाफी भी लेकिन किसान पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। किसान नेता अमराराम की अगुवाई में किसानों ने दुबारा जयपूर कूच की चेतावनी दी। इस बीच विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद सभी दलों की ओर से इस मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल किया गया गया।
Published on:
24 Dec 2021 06:44 pm
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