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अंगिका के ख्याति प्राप्त कवि हीरा प्रसाद का निधन

अंगिका साहित्य के जिला अध्यक्ष डॉक्टर राधेश्याम चौधरी ने कहा कि बिहार के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में हीरा प्रसाद की कई रचनाएं छात्र-छात्राएं पठन-पाठन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंगिका के ख्याति प्राप्त कवि हीरा प्रसाद के असामयिक निधन से अंगिका भाषा को अपूरणीय क्षति हुई है।

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गोड्डा. अंगिका भाषा साहित्य संघ के राष्ट्रीय महामंत्री और ख्याति प्राप्त कवि हीरा प्रसाद का निधन हो गया। हीरा प्रसाद का बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित आवास में 16 मई को निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। हीरा प्रसाद लंबे समय से बीमारी के चल रहे थे। उन्होंने अंगिका भाषा में खंडकाव्य, महाकाव्य, प्रबंध काव्य आदि कई रचनाएं की‌। अंगिका साहित्य के जिला अध्यक्ष डॉक्टर राधेश्याम चौधरी ने कहा कि बिहार के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में हीरा प्रसाद की कई रचनाएं छात्र-छात्राएं पठन-पाठन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंगिका के ख्याति प्राप्त कवि हीरा प्रसाद के असामयिक निधन से अंगिका भाषा को अपूरणीय क्षति हुई है।

अंगिरा भाषा को उत्कर्ष तक पहुंचाया

अंगिका भाषा साहित्य संघ प्रदेश के महासचिव डॉ. प्रदीप प्रभात, डॉ कैयूम अंसारी, डॉ मनोज राही, डॉ ब्रह्मदेव कुमार, धनेश्वर पंडित सहित कई गणमान्य विद्वानों हीरा प्रसाद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। डॉ. प्रदीप प्रभात ने कहा कि हीरा बाबू ने सही मायने में अंगिका भाषा को उत्कर्ष तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान दिया है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकते। इस मामले में वह हीरा थे। उन्होंने कहा कि उनकी भरपाई अंगिका के क्षेत्र में नहीं की जा सकती है। वह सरल हृदय के व्यक्ति थे, किसी भी माहौल में अपने को ढ़ाल लेते थे। बच्चों के साथ तो वे बच्चे बन जाते थे। उनकी कमी अंगिका क्षेत्र में रहने वाले लोगों को हमेशा खलती रहेगी।