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Udaipur News: बेटी और उसकी सहेली से बलात्कार के केस में सौतेले पिता को आजीवन कारावास

पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग बेटी और उसकी सहेली से बलात्कार के आरोप में सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस अपराध को समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी के लिए कोई नरमी नहीं बरती और सख्ती से फैसला दिया।

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उदयपुर: लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) न्यायालय संख्या-2 ने एक गंभीर मामले में गुरुवार को फैसला सुनाते हुए नाबालिग बेटियों से बलात्कार के आरोपी सौतेले पिता को दोषी करार दिया है। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

बता दें कि फैसला पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने सुनाया। निर्णय में कहा कि यह अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि समाज के विरुद्ध है। ऐसे मामलों में नरमी कानून के उद्देश्य के विपरीत होगी। प्रकरण मावली थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है।

केस के मुताबिक, 22 मार्च 2025 को नाबालिग लड़की ने महिला सलाह एवं सुरक्षा केंद्र में बयान देकर बताया कि उसका सौतेला पिता लंबे समय से उसके साथ ज्यादती कर रहा है। आरोपी उसे शराब पिलाकर नशे की हालत में बलात्कार करता और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता था।

यह भी सामने आया कि आरोपी ने एक अन्य नाबालिग बालिका, जो उसकी सहेली थी और अस्थायी रूप से उसके घर पर रह रही थी, उसके साथ भी इसी प्रकार का कृत्य किया। दोनों बालिकाएं घटना के समय 16 वर्ष से कम उम्र की थी।

सजा के साथ जुर्माना

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) न्यायालय ने आरोपी सौतेले पिता को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2) (एफ) के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माना, पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(जे)(एन)/6 के तहत आजीवन कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

17 गवाह और 48 दस्तावेज

पुलिस जांच में पीड़िताओं के मेडिकल परीक्षण, उम्र संबंधी दस्तावेज, घटनास्थल का निरीक्षण, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयान जुटाए। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक महेंद्र ओझा ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित किया। उन्होंने 17 गवाह और 48 दस्तावेज पेश किए।

पीड़िताओं को प्रतिकर लाभ

पीड़िताओं को 10-10 लाख प्रतिकर देने के आदेश दिए। राशि एफडीआर के रूप में जमा रहेगी और पीड़िताओं के बालिग होने पर दी जाएगी। इसकी निगरानी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करेगा। साथ ही पीड़िताओं की देखरेख, शिक्षा और संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति को जिम्मेदारी सौंपी है।

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