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शिक्षकों की कमी से स्कूल पर जड़ा ताला, समझाइश के बाद खोला ताला

चाकसू. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शक्करखावदा में शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बोर्ड और वार्षिक परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से बच्चों की […]

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चाकसू. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शक्करखावदा में शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बोर्ड और वार्षिक परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो चुकी है।

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में कुल आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र तीन शिक्षक ही नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं। शेष शिक्षकों में से कुछ को प्रतिनियुक्ति पर अन्यत्र भेज दिया गया है, जबकि कुछ को बीएलओ ड्यूटी में लगाया गया है। इससे कक्षा संचालन प्रभावित हो रहा है। कई कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे न तो बच्चों को विषयवार पढ़ाई मिल पा रही है और न ही पाठ्यक्रम पूरा हो पा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही विद्यालय में पूरे शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि परीक्षा नजदीक होने के बावजूद बच्चों को नियमित पढ़ाई नहीं मिल रही है। इससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई बच्चे निजी विद्यालयों में प्रवेश लेने को मजबूर हो रहे हैं।

सूचना पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश कर ताला खुलवाया और जल्द शिक्षकों की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए। फिलहाल स्कूल में पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं, अब उन्हें सिर्फ कार्रवाई चाहिए।

इस घटना से क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देती है तो गांव के स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।