13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

icon

वीडियो

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

हुबली

धारवाड़ लोकसभा सीट से प्रल्हाद जोशी को बदलें

वर्तमान सामाजिक मुद्दों, धार्मिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए बुधवार को मूरुसाविरमठ में हुई मठ प्रमुखों की चिंतन मंथन बैठक में भारतीय जनता पार्टी से 31 मार्च तक धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रल्हाद जोशी की जगह दूसरे उम्मीदवार की घोषणा करने की मांग की।

Google source verification

मठ प्रमुखों ने की मांग
भाजपा को दी 31 मार्च तक की समयसीमा
अगामी फैसला 2 अप्रेल की बैठक में लिया जाएगा
हुब्बल्ली. वर्तमान सामाजिक मुद्दों, धार्मिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए बुधवार को मूरुसाविरमठ में हुई मठ प्रमुखों की चिंतन मंथन बैठक में भारतीय जनता पार्टी से 31 मार्च तक धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रल्हाद जोशी की जगह दूसरे उम्मीदवार की घोषणा करने की मांग की।
मूरुसाविर मठ के डॉ. गुरुसिद्ध राजयोगींद्र स्वामी,मुरुघा मठ के डॉ. मल्लिकार्जुन स्वामी के सानिध्य में शिरहट्टी के फकीर दिंगालेश्वर स्वामी के नेतृत्व में सैकड़ों मठ प्रमुखों ने भाग लेकर यह निर्णय लिया गया। इसके बाद पत्रकारों को इसकी जानकारी दी गई।
दिंगालेश्वर स्वामी ने कहा कि वीरशैव लिंगायत धर्म गिरावट पर है, सामाजिक उप-संप्रदाय प्रभावित होते हैं, तो समाज के नेताओं को चोट लगने पर मठ प्रमुखों को बोलना चाहिए। उत्तर भारत में साधु संन्यासी राजनीति करते हैं। दक्षिण भारत में नहीं करते। हमें भी चुनाव में खड़ा होना चाहिए या नहीं, इस बारे में चर्चा हुई और अनिवार्य रूप से मठ प्रमुखों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया।
बहुसंख्यक लिंगायत नेता दमन का शिकार हुए हैं। महिला प्रतिनिधियों को अपमानित किया गया है। प्रल्हाद जोशी से वीरशैव लिंगायत नेताओं के साथ अन्याय हुआ है, लिंगायतों के जरिए निर्वाचित हुए हैं। इसके चलते लिंगायत नेता की आवश्यकता को लेकर यह निर्णय लिया गया है। चुनाव आने पर मात्र उन्हें हमारे समाज प्यार क्यों आता है। उन्हें सत्ता का घमंड चड़ है।
जोशी को धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से 31 मार्च तक नहीं बदला तो 2 अप्रेल को मठ प्रमुख दोबारा बैठक कर उचित निर्णय लेंगे।
सवनूर कलमठ के चन्नबसव स्वामी, सदाशिवपेट के गदिगेश्वर स्वामी, बोम्मनहल्ली शिवयोगीश्वर स्वामी, विजयपुर के सिद्धलिंग देवरु, संगनबासव देवरु, शिवलिंगस्वामी मंटूर, सवनूर के चन्नबसवेश्वर स्वामी समेत राज्य के सभी कोनों से मठ प्रमुख आए थे।