करौली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) रेगुलेशन एक्ट 2026 को लेकर लोगों के विरोध के स्वर लगातार मुखर हो रहे हैं। बुधवार को जिला मुख्यालय पर सामान्य वर्ग के लोगों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान मोदी सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए यूजीसी अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
लोग सुबह मदनमोहनजी मंदिर के समीप नगरपालिका पर एकत्रित हुए, जहां से जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट के लिए रवाना हुए। फूटाकोट, सदर बाजार, बड़ा बाजार, वजीरपुर गेट होते हुए लोग कलक्ट्रेट पहुंचे। इस बीच लोग और युवा यूजीसी के नए नियमों के विरोध में नारे लगाते हुए चल रहे थे। वहीं कलक्ट्रेट पहुंचने पर केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन कर सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलक्टर को सौंपा गया। इसमें बताया है कि हाल ही में जारी किया गया यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्््यूट रेगुलेशन सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए हानिकारक है। उनका कहना था कि यह अधिनियम विद्यार्थियों के शिक्षा के प्रति मनोबल को कमजोर करेगा और उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। ज्ञापन में बताया कि यह अधिसूचना संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार अनु‘छेद 14, 15 और 21 ए की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक्ट वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस दौरान मदनमोहन पचौरी और उद्योङ्क्षसह एडवोकेट ने कहा कि &0 जनवरी को करौली इन मैरिज गार्डन में बैठक होगी और बिल वापस नहीं लेने पर एक फरवरी को भारत बंद के तहत करौली में बंद रहेगा। इस दौरान ब्राह्मण समाज अध्यक्ष मदनमोहन पचौरी, अग्रवाल समाज जिलाध्यक्ष मूलचन्द गुप्ता, एडवोकेट नगेन्द्र व्यास, वेदप्रकाश उपाध्याय, उद्योङ्क्षसह एडवोकेट, बबलू शुक्ला, योगेन्द्र ङ्क्षसहल, पंकज शर्मा, श्यामलाल बजाज, वैभव पाल, नरेन्द्र ङ्क्षसह जादौन, चौरजीङ्क्षसह, महेश ङ्क्षसह सरपंच, एडवोकेट महेन्द्र मुद्गल, अमरङ्क्षसह तंवर, डॉ. देवकुमार शर्मा, विक्की बजाज सहित अन्य अन्य मौजूद रहे।
चौपाइयों के गूंजे स्वर
कलक्ट्रेट परिसर पहुंचने पर भी लोगों ने नए नियमों को लेकर काफी देर तक नारे लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। इस बीच अनेक युवा परिसर में बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। बाद में अतिरिक्त जिला कलक्टर मौके पर पहुंचे, जिन्हें ज्ञापन सौंपा गया।
क्या है नए नियम
यूजीसी का कहना है कि नए नियम का उद्देश्य एससी, एसटी और ओबीसी स्टूडेंटस के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और उस पर निगरानी रखना है। इसके तहत यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उ‘च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24 गुणा 7 हेल्पलाइन, इक्विटी अपॉर्चुनिटी सेंटर, इक्विटी स्क्वाड और इक्विटी कमेटी का गठन करना होगा। नियम न मानने पर मान्यता रद्द की जा सकती है।
इसलिए हो रहा विरोध: इन नियमों से सामान्य वर्ग के स्टूडेंटस को निशाना बनाया जा सकता है। झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। इस वजहसे किसी पर भी बिना सबूत झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं। उनका करियर प्रभावित होगा। वहीं इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का जरूरी नहीं बताया गया है। स्क्वाड को काफी अधिकार दे दिए गए हैं और भेदभाव परिभाषा स्पष्ट नहीं है।
इसके अलावा ड्राफ्ट में झूठी या दुर्भावना शिकायतों के लिए जुर्मान या सस्पेंड करने का प्रावधान था। लेकिन अधिसूचित नियमों में इन प्रावधानों को हटाया गया है। ऐसे में सामान्य वर्ग का कहना है कि नए नियमों का दुरुपयोग होगा।