पूरा देश भले ही नए साल का स्वागत कर रहा है.. मगर, उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक परिवार के लिए अब नया साल कभी नहीं आएगा। यहां अब कभी सुबह नहीं होगी। एक ही परिवार के तीन सदस्य… मां और उसके दो बेटे… एक साथ चिता में समा गए। शुकतीर्थ की पवित्र बाणगंगा नदी का किनारा एक ऐसे मंजर का गवाह बना, जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। देवबंद तहसील के कानूनगो अमित गौड़, उनकी मां सुशीला और छोटे भाई नितिन गौड़ का शुकतीर्थ में बाणगंगा नदी के किनारे एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटियों की करुण चीखों से उस वक्त माहौल गमगीन हो गया, जब उन्होंने कांपते हांथों से अपने पिता-चाचा और दादी की चिता को मुखाग्नि दी। शुकतीर्थ की पवित्र बाणगंगा नदी का किनारा आज सिर्फ अंतिम संस्कार का स्थल नहीं था, बल्कि वो एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना, जिसे देखकर आंखें नम और कलेजा कांप उठा। ऐसा लगा… मानो श्मशान घाट ही नहीं, पूरा आसमान रो रहा हो।