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फिल्मी अ​भिनेत्री मंदाकिनी बोलीं- आज भी ‘सुन साहिबा सुन’ ही मेरी पहचान है

नब्बे के दशक की सुपर हिट फिल्म " राम तेरी गंगा मैली" से सुनहरे पर्दे पर युवाओं की धकड़न बनी फिल्म अभिनेत्री मंदाकिनी के प्रति आज भी उनके प्रशंसकों में दीवानगी बरकरार है। वह भीलवाड़ा पहुंची तो उनका दिल खोलकर स्वागत हुआ और उनसे मिलने की होड रही।

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भीलवाड़ा। नब्बे के दशक की सुपर हिट फिल्म ” राम तेरी गंगा मैली” से सुनहरे पर्दे पर युवाओं की धकड़न बनी फिल्म अभिनेत्री मंदाकिनी के प्रति आज भी उनके प्रशंसकों में दीवानगी बरकरार है। शुक्रवार को वह भीलवाड़ा पहुंची तो उनका दिल खोलकर स्वागत हुआ और उनसे मिलने की होड रही। इसी दौरान उनकी राजस्थान पत्रिका से बातचीत हुई। बातचीत में उन्होंने कहा कि रूपहले पर्दे पर वक्त के साथ सब बदल जाता है, लेकिन प्रशंसकों के बीच पहचान वहीं रहती है। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल: आपकी पहचान किस रूप में होती है ?

जवाब: मैं, देश व दुनियां में किसी भी हिस्से में जाती हूं, मेरी पहचान आज भी फिल्म राम तेरी गंगा मैली के सुपर हिट गीत सुन-साहिबा-सुने से ही है। यह मेरी खुश किस्मत ही रही की मुझे ऐसा अच्छा गीत मिला।

सवाल: फिल्मी जमाने में कोई बडा बदलाव आया?

जवाब: वक्त के साथ सब बदला है, पहले भी बहुत कुछ अच्छा था, और आज भी अच्छा है, लेकिन कहीं ना कहीं कोई बड़ागेप तो आया ही है। हां, मेरा फिल्मी दौर छोटा रहा, लेकिन अच्छा रहा।

सवाल: राम तेरी गंगा मैली” में बोल्ड सीन को लेकर आप चर्चा में रही थी, मौजूदा हालात पर क्या कहेंगी ?

जवाब: मेरे हिसाब से फिल्म में रोल किया था, लेकिन अब तो उस जमाने से भी कही अधिक हो रहा है।

सवाल: आप अपनी बायोपिक बनाना पसंद करेगी ?

जवाब: हंसते हुए टाल दिया, फिर फिलहाल मेरा कोई इरादा नहीं है

सवाल: छोटे पर्दे पर फिर से कुछ नया करने की योजना है क्या ?

जवाब: फिर से काम करने की कोशिश कर रही हूं, आप सभी से उम्मीद है कि जो प्यार आपने पहले दिया था वो फिर से देना।

सवाल: भीलवाड़ा का अनुभव बताए ?

जवाब: भीलवाड़ा में पहली बार आई हूं, यहां के लोगों से मिल कर अच्छा लगा और अच्छा ही अनुभव मिला। इच्छा है कि दोबार आपस लोगों से मिलूं।