13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

icon

वीडियो

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

सिरोही

16 वर्षों से कछुआ चाल चल रही है माउंट आबू की 1 अरब रुपए की योजना, चेम्बर लीक होने से पोलो ग्राउंड में बह रहा है गंदा पानी

sपालिका अध्यक्ष ने लिया जायजा, जिला कलक्टर को लिखा पत्र - एनजीटी व गजट नोटिफिकेशन का उल्लंघन, सीवरेज कंपनी ने मनमर्जी से लगाए ट्रीटमेंट प्लांट - कॉलोनियों के बीचों-बीच बने एसटीपी से लोगों का रहना हुआ मुश्किल - आवासीय कॉलोनी के साथ तालाब, स्कूल, मंदिर व गौशाला भी प्रभावित

Google source verification

माउंट आबू. राज्य सरकार के निर्देश पर 2007 से माउंट आबू में शुरू हुए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रपोजल की ढीली मॉनिटरिंग के चलते शहर की दशा और दिशा दोनों ही बिगड़ गई है। वर्तमान सीवरेज कार्य में लगी कंपनी की मनमर्जी के कारण कई कॉलोनीवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं माउंट आबू निवासियों व पर्यटकों की लाइफ लाइन कही जाने वाले पोलो ग्राउंड में बुधवार को सीवरेज का चेम्बर लीक होने से पूरे मैदान में गंदा पानी बहा। जिससे पर्यटकों व लोगों ने भी नाराजगी जताई। सूचना मिलने पर पालिका अध्यक्ष जीतू राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे व रूडीप के कार्य पर असंतोष जताते हुए पूरे मामले की जांच को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा। इतना ही नहीं रुडीप की ओर से नियम विरुद्ध देलवाडा के पास आवासीय कॉलोनी धमाणी, स्वामीनारायण स्कूल के पास, तोरना स्थित आंगनबाड़ी के पास, डाक बंगले के पास व एयर फोर्स स्टेशन के पास लघु सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन होने से लोगों के हाल बेहाल हो गए है।

वीआईपी एरिया मिनिस्ट्री कॉटेज के नीचे नींबू नाला के पास रहने वाले 22 परिवारों को राज्य सरकार ने 2011 में गुरुकुल रोड स्थित धमाणी में विस्थापित किया गया था, लेकिन यहां पर बड़ा ट्रीटमेंट प्लांट बनने से अब इनमें से कई परिवार सरकार से इस प्लांट को या फिर उन्हें अन्य स्थान पर विस्थापित करने की गुहार लगा चुके हैं।

स्कूल, तालाब, मंदिर व गोशाला को भी किया नजर अंदाज

शहरवासी सीवरेज लाइन के समर्थन में है, लेकिन रुडीप ने केन्द्र सरकार की 2009 में जारी की गई गाइडलाइन व एनजीटी के नियमों को ताक में रखकर पांच स्थानों पर नियम विरुद्ध लघु सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना दिए। सरकारी गाइडलाइन के अनुसार किसी भी आवासीय कॉलोनी, मंदिर, विद्यालय व जल स्रोत से 500 मीटर दूर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करने के निर्देश दिए गए है। जबकि माउंट आबू में बनाए गए सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आवासीय कॉलोनी के बीचों बीच है। इतना ही नहीं धमाणी में बनाया गया प्लांट आदर्श विद्या मंदिर, वेद विद्यालय, शिव मंदिर व बड़े तालाब से मात्र 2 फीट दूरी पर निर्माण किया गया। इस तालाब से वर्तमान में विद्यालय के 700 छात्रों व गौशाला में गायों के लिए पेयजल आपूर्ति के साथ प्रतिदिन शिव मंदिर में जलाभिषेक भी किया जाता है। इतना ही नहीं पूर्व में अकाल के दौरान कई बार शहर में पेयजल आपूर्ति भी इसी तालाब से की गई थी, लेकिन अब यह ट्रीटमेंट प्लांट बनने से इस तालाब का पानी दूषित होने की आशंका है।

2007 से शुरू हुई योजना, कब पूरी होगी कोई पता नहीं

16 वर्षों से चल रही शहर को सीवरेज से जोडऩे की योजना कब पूरी होगी इसका किसी को अंदाजा नहीं है। 23 जुलाई 2007 को 34.37 करोड रुपए की लागत से शुरू हुई सीवरेज परियोजना को आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। 22 जुलाई 2010 तक इस योजना को पूरा करना था, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के कारण बीच में ही यह योजना ठप हो गई। 13 वर्ष बाद सरकार ने फिर से 60 करोड रुपए का बजट स्वीकृत कर रुडीप को फरवरी 2020 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। सीवरेज कार्य में लगी कम्पनी ने 54 वर्ग किलोमीटर के दायरे में भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया, लेकिन कई वर्ष बीतने के बावजूद भी हालात कछुआ चाल जैसे ही बने हुए हैं। नो कंस्ट्रक्शन जोन में करीब 16 साल से सीवरेज के नाम पर बजरी, पत्थर, ईंटों व सीमेंट की माउंट आबू में हो रही कालाबाजारी का गोरखधंधा अब शहरवासी भी समझने लगे है। साथ ही सीवरेज कार्य में लगे लोगों पर भी शहरवासी लम्बे समय से परेशान करने का आरोप लगा रहे है।

ढीली मॉनिटरिंग से बदहाल हुई सडकें

पर्यटन नगरी माउंट आबू में सरकारी कार्य करने वाली एजेंसियों पर प्रशासन की ढीली पकड़ के कारण वे बेलगाम हो चुके हैं और सडक़ सहित कई कार्यों की मॉनिटरिंग ढंग से नहीं होने के कारण सडक़ों की हालत बदतर हो चुकी है। जगह-जगह चेंबर बाहर होने व लीकेज के कारण पर्यटक ही नहीं आमजन भी परेशान है। इसी की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं। टोल नाके से लेकर नक्की लेक तक, नेपाली मार्केट, मासगांव, तोरणा सहित देलवाड़ा रोड पर भी जगह-जगह किए गए गड्ढे व चेंबर खुले होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं।

यहां की बदहाली की तस्वीर ले जा रहे देशभर के पर्यटक

माउंट आबू घूमने आने वाले लाखों पर्यटकों की वजह से यहां के हर व्यक्ति का रोजगार व पर्यटन व्यवसाय चमकता है, लेकिन पर्यटकों का कहना है कि यहां का नगरपालिका प्रशासन व वन विभाग जब हमसे पूरा शुल्क लेता है तो इसकी सुविधा भी पूरी मिलनी चाहिए। अहमदाबाद के न्यू मणिनगर से आए पर्यटक राजू भाई राठौड ने कहा कि प्रशासन चाहे तो हमसे जो शुल्क लेता है उसमें डेढ़ गुना इजाफा भी कर सकते हैं, लेकिन सुविधा गुजरात राज्य जैसी होनी चाहिए। मेहसाणा निवासी सुनील भाई ने कहा कि हमसे माउंट आबू घूमने आने पर हर वस्तु के डेढ़ गुना पैसे लिए जा रहे हैं फिर भी गुजराती पर्यटक राजी हो कर देता है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने से हमें दुख होता है।

इनका कहना

मैंने जिला कलक्टर को पत्र लिखा है। रूडीप का कार्य संतोषजनक नहीं है। जगह-जगह गड्ढे व सडक़ें टूटी होने से दुर्घटनाएं हो रही है। रुडीप के अब तक के कार्यों की पूरी जांच होनी चाहिए।

जीतू राणा, अध्यक्ष, नगरपालिका, माउंट आबू