
दावोस में मुलाकात करते ट्रंप और ज़ेलेंस्की। ( फोटो: पत्रिका)
Diplomacy: स्विट्जरलैंड की बर्फीली वादियों में दुनिया भर के नेताओं का जमघट लगा हुआ है, लेकिन अधिकतर नेताओं की निगाहें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के नेता वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की मुलाकात पर टिकी रहीं। 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के लॉन्च के साथ-साथ ट्रंप ने ज़ेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि ट्रंप का 'पीस प्लान' (Russia Ukraine Peace Deal) यूक्रेन के लिए क्या मायने रखता है। ट्रंप और ज़ेलेंस्की की इस बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु युद्ध विराम और यूक्रेन का पुनर्निर्माण रहा। ट्रंप ने हमेशा से दावा किया है कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को "24 घंटे के अंदर" रुकवा सकते हैं। दावोस में हुई इस(Trump Zelenskyy Davos Meeting) चर्चा में ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की रक्षात्मक जरूरतों और संप्रभुता का मुद्दा उठाया, जबकि ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने के लिए व्यावहारिक और व्यापारिक दृष्टिकोण (Business-like approach) अपनाने पर जोर दिया।
हथियारों की आपूर्ति: बातचीत के दौरान भविष्य में मिलने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता और उसकी शर्तों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
शांति की शर्तें: ट्रंप की टीम शांति के लिए जो खाका तैयार कर रही है, उसमें यूक्रेन की सीमाओं और रूस के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर अहम बिंदु शामिल हैं।
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के लिए यह मुलाकात बहुत चुनौतीपूर्ण थी। उन्हें पता है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति 'अमेरिका फर्स्ट' पर केंद्रित है। ज़ेलेंस्की ने ट्रंप को यह समझाने की कोशिश की कि यूक्रेन की स्थिरता पूरे यूरोप और अमेरिका के आर्थिक हितों के लिए क्यों जरूरी है। वहीं, ट्रंप का रुख यह रहा कि वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा अनंत काल तक युद्ध में नहीं झोंकना चाहते और जल्द से जल्द एक समाधान चाहते हैं।
वैश्विक विशेषज्ञों का रिएक्शन मिला-जुला हुआ है। कुछ लोगों का कहना है कि ट्रंप की सीधी बातचीत युद्ध रोकने का एकमात्र रास्ता हो सकती है। वहीं, यूरोपीय देशों के कूटनीतिज्ञ इस बात से आशंकित हैं कि कहीं शांति के नाम पर यूक्रेन को अपनी जमीन से समझौता न करना पड़े। ज़ेलेंस्की ने बैठक के बाद संकेत दिए कि बातचीत "सकारात्मक" रही, लेकिन अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है।
एक पहलू यह भी है कि इस मुलाकात पर रूस की पैनी नजर है। व्लादिमीर पुतिन ने अभी तक इस पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन ट्रंप की सक्रियता ने रूस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ (EU) इस बात से परेशान है कि अगर ट्रंप और ज़ेलेंस्की के बीच कोई डील होती है, तो यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की भूमिका कम हो सकती है।
बहरहाल,आने वाले दिनों में वाशिंगटन और कीव के बीच और उच्च स्तरीय बैठकें हो सकती हैं। ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में यूक्रेन की भूमिका क्या होगी और क्या रूस इस बातचीत के बाद मेज पर आने के लिए तैयार होगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा। दुनिया अब ट्रंप के उस 'सीक्रेट प्लान' के सार्वजनिक होने का इंतजार कर रही है।
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Updated on:
22 Jan 2026 08:49 pm
Published on:
22 Jan 2026 08:48 pm
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