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चीन-पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी! भारत-अमेरिका की इस सैन्य डील से बदलेगा हिंद महासागर का गेम

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी नई ऊंचाई पर पहुंचती दिख रही है। 3 अरब डॉलर की P-8I विमान डील से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत होगी और चीन-पाकिस्तान पर नजर और पैनी होगी।

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maritime surveillance aircraft

Representative Image (File Photo/ANI)

हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान से जुड़ी बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारत अमेरिका के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को लगातार मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में जहां लंबे समय से अपेक्षाकृत शांत पड़े QUAD को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हुई है, वहीं दूसरी ओर भारत और अमेरिका करीब 3 अरब डॉलर की बड़ी रक्षा डील पर सहमत होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

इस प्रस्तावित डील के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह P-8I एंटी-सबमरीन युद्धक और समुद्री निगरानी विमान खरीदे जाएंगे, जिससे नौसेना की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को और मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक रिश्तों में आई गर्मजोशी के बीच सामने आया है। हालिया व्यापार समझौते के बाद इस रक्षा सौदे पर बातचीत में तेज़ी आई है और प्रगति तेजी से हुई है।

क्या है यह डील?

ट्रेड डील पर सहमति के बाद भारत छह Boeing P-8I विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इस सौदे का कुल मूल्य लगभग USD 3 बिलियन बताया जा रहा है। इन विमानों का इस्तेमाल पनडुब्बी रोधी अभियानों (Anti-Submarine Warfare) और समुद्री निगरानी के लिए किया जाएगा। रक्षा सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारतीय नौसेना का यह प्रस्ताव लंबे समय से चर्चा में था, लेकिन कीमत से जुड़े मुद्दों के कारण बातचीत कुछ समय तक अटकी रही।

नौसेना की ताकत होगी और मजबूत

यह डील भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगी। फिलहाल नौसेना के पास 12 P-8I विमान पहले से मौजूद हैं, जो देश के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटों पर सतर्क निगरानी का काम कर रहे हैं।अब यह नया प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम स्वीकृति मिलनी होगी।P-8I विमान भारतीय नौसेना की निगरानी प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं और इनका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में चीनी और पाकिस्तानी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है।

15 MQ-9 UAV की डिलीवरी 2029 से

इसके अलावा, भारतीय नौसेना की अनमैन्ड (बिना पायलट) निगरानी क्षमता को भी बड़ा बढ़ावा मिलने वाला है। नौसेना को 15 MQ-9 ‘सी गार्डियन’ हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन मिलने हैं, जिनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय रक्षा बल अपनी निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए 87 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन भी शामिल कर रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या भारतीय नौसेना को दी जाएगी।