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भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की कोलंबो के गंगारामया मंदिर में लगी प्रदर्शनी

Ahmedabad. भगवान बुद्ध के पवित्र देव नी मोरी अवशेषों को लेकर भारतीय प्रतिनिधि मंडल श्रीलंका पहुंचा। कोलंबो के गंगारामया मंदिर में उनकी प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व का अनूठा नजारा देखने को मिला। यह आयोजन भारत व श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत में निहित स्थायी संबंधों को और मजबूत […]

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Ahmedabad News

Ahmedabad. भगवान बुद्ध के पवित्र देव नी मोरी अवशेषों को लेकर भारतीय प्रतिनिधि मंडल श्रीलंका पहुंचा। कोलंबो के गंगारामया मंदिर में उनकी प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व का अनूठा नजारा देखने को मिला। यह आयोजन भारत व श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत में निहित स्थायी संबंधों को और मजबूत करने में मददगार होगा।

ये पवित्र अवशेष भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान से श्रीलंका पहुंचे। भारत-श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों को लेकर श्रीलंका पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हैं।कोलंबो के गंगारामया मंदिर में लगाई गई अवशेषों की प्रदर्शनी प्रदर्शनी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के तहत आयोजित की जा रही है। जिसमें श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी।

श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ किया उद्घाटन

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन बुधवार को कोलंबो के गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने और गुजरात के राज्यपाल तथा उपमुख्यमंत्री ने मिलकर किया। इस अवसर पर गंगारामया मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. किरिंदे असाजी थेरो भी उपस्थित थे।इस प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर में "पवित्र पिपरावा का अनावरण" और "समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव" शीर्षक से दो प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया गया।पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विधिपूर्वक स्वागत किया गया और उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी गुरुवार से आम जनता के लिए खोली गई, जिससे श्रीलंका और दुनिया भर के श्रद्धालु श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ये पवित्र अवशेष वहां पहुंचे जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

भारत के बाहर पहली प्रदर्शनी

यह प्रदर्शनी भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है। इससे पहले, भारत ने श्रीलंका में वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों की प्रदर्शनी और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की थी। यह अवशेष गुजरात के वडोदरा शहर में स्थित एमएसयू संग्रहालय में रखे गए थे।

पीएम मोदी ने व्यक्त की खुशी

प्रदर्शनी के उद्घाटन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने अपने ट्विट में लिखा कि अप्रैल 2025 में मेरी यात्रा के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि ये अवशेष श्रीलंका लाए जाएंगे, जिससे लोगों को श्रद्धा अर्पित करने का अवसर प्राप्त हो सके।