
पर्ल फार्मिंग का पौंड और सोनू यादव की फोटो: पत्रिका
अलवर के कोटकासिम तहसील के सानोदा गांव निवासी सोनू यादव ने परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया और पर्ल फार्मिंग (मोतियों की खेती) के जरिए लाखों रुपए की कमाई कर मिसाल कायम की है। स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने वाले सोनू यादव ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पर्ल फार्मिंग की तकनीकी जानकारी जुटाई और वर्ष 2023 में इस नवाचार की शुरुआत की।
उन्होंने पहले चरण में 50 हजार सीपों से पर्ल फार्मिंग शुरू की। सीपों के लिए 120 बाई 85 फीट का विशेष तालाब (पौंड) तैयार किया गया। सोनू पश्चिमी बंगाल की एक पर्ल फार्मिंग कंपनी से जुड़े, जो उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और समस्याओं के समाधान में निरंतर सहयोग प्रदान करती है। सोनू ने बताया कि कंपनी के विशेषज्ञ समय-समय पर सीपों की जांच भी करते हैं।
गौरतलब है कि पहली बार मोतियों की उपज 22 महीने में तैयार हुई। एक सीप की लागत 55 रुपए आती है और प्रत्येक सीप से दो मोती प्राप्त होते हैं। तैयार मोतियों को कंपनी 230 रुपए प्रति सीप की दर से खरीदती है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 24 लाख 60 हजार रुपए का खर्च आया, जबकि कुल उत्पादन से 50 लाख 60 हजार रुपए की आय हुई। इससे सोनू को अच्छा खासा मुनाफा मिला। अब दूसरी फसल का उत्पादन 2026 में होने की संभावना है।
दूसरे चरण में सोनू ने उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से इस बार एक लाख सीप लगाए हैं। सीप लगाने के बाद उन्हें टैंक में रखा जाता है। इसके बाद सीप की सर्जरी कर उसमें दो न्यूक्लियस डाले जाते हैं। इसके पश्चात सीपों को पानी में डुबोकर रखा जाता है। मोती की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यकतानुसार विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ डाले जाते हैं।
सीपों के जीवित रहने और स्वस्थ विकास के लिए ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति आवश्यक होती है, इसके लिए विशेष ऑक्सीजन मशीन लगाई गई है। साथ ही पानी की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाती है। पानी का टीडीएस 800 से कम, पीएच मान 6 से 8 के बीच और अमोनिया की मात्रा 0.5 होनी चाहिए। इन मानकों के अनुकूल वातावरण में ही सीपों में अच्छे और चमकदार मोती तैयार होते हैं।
पर्ल फार्मिंग से न केवल अच्छी आय हो रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इस फार्म पर अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सोनू यादव का कहना है कि सही तकनीक, धैर्य और नियमित देखभाल से पर्ल फार्मिंग किसानों और युवाओं के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बन सकता है।
Updated on:
09 Feb 2026 02:08 pm
Published on:
09 Feb 2026 02:07 pm
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