Rambhadracharya Ram Katha Lucknow: लखनऊ में रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज की सराहना करते हुए कहा कि वे युवाओं को धर्म से जोड़ रहे हैं। उन्होंने वीआईपी दर्शन व्यवस्था और गोवध पर भी खुलकर विचार रखे।
Rambhadracharya Praises Premanand Maharaj: राजधानी लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने धर्म, समाज, राजनीति और सनातन परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मथुरा के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की सराहना करते हुए कहा कि वे देश के युवाओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली समेत बड़ी संख्या में युवा उनसे मिलने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
रामभद्राचार्य ने कहा कि आज के समय में युवाओं को सही दिशा देने की सबसे अधिक आवश्यकता है और संत समाज का दायित्व है कि वह समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करे। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और उनके प्रयासों का प्रभाव युवाओं के बीच स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि एक संन्यासी का मूल धर्म साधना करना और समाज को सही दिशा प्रदान करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में लोग अपने कर्तव्यों से अधिक दूसरों को उपदेश देने में व्यस्त दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि अपना काम कोई करना नहीं चाहता, लेकिन दूसरों का काम बताने के लिए सभी तैयार रहते हैं। हर व्यक्ति नेतृत्व करना चाहता है, जबकि सबसे पहले अपने दायित्वों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संतों और संन्यासियों को अपने मूल धर्म का पालन करते हुए समाज को आध्यात्मिक और नैतिक दिशा देने का कार्य करना चाहिए।
राजनीति और संन्यास के संबंध पर बोलते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि सामान्य रूप से संन्यासी का मुख्य कार्य राजनीति करना नहीं होता। उनका प्रमुख दायित्व साधना, धर्म प्रचार और समाज का मार्गदर्शन करना है। हालांकि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख करते हुए उन्हें एक अपवाद बताया। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ संन्यासी होते हुए भी प्रशासन और शासन की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के लिए अच्छा कार्य कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था से लेकर विकास तक अनेक क्षेत्रों में सकारात्मक प्रयास दिखाई दे रहे हैं।
रामभद्राचार्य ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अध्यात्म और धर्म की ओर आकर्षित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज के प्रवचन और मार्गदर्शन ने युवाओं के बीच नई चेतना जगाने का कार्य किया है।उन्होंने कहा कि जब विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी और अन्य युवा संतों से मिलने पहुंचते हैं तो यह समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी अध्यात्म और संस्कारों का महत्व बना हुआ है।
रामभद्राचार्य ने धार्मिक स्थलों पर वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि वे मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर वीआईपी संस्कृति के पूरी तरह विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में सभी भक्त समान होते हैं। वहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। चाहे कोई सामान्य व्यक्ति हो या कोई बड़ा पदाधिकारी, सभी को समान रूप से दर्शन का अवसर मिलना चाहिए। धार्मिक स्थलों पर विशेष सुविधाओं की व्यवस्था श्रद्धालुओं के बीच असमानता की भावना पैदा करती है, जो उचित नहीं है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा और उसके मूल्यों को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज को अनावश्यक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों और मूल्यों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा हजारों वर्षों से मानवता को मार्गदर्शन देती रही है। यदि समाज अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहेगा तो किसी भी चुनौती का सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
अपने संबोधन के दौरान रामभद्राचार्य ने समाज को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ जागरूक रहने का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के अत्याचार को चुपचाप सहने की प्रवृत्ति समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म हमें केवल पूजा-पाठ ही नहीं सिखाता, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा भी देता है। समाज को अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों के प्रति सजग रहना चाहिए।
गाय के विषय पर बोलते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में पहले से ही माता का स्थान रखती है। उन्होंने कहा कि गाय को माता घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारतीय समाज सदियों से उसे माता के रूप में सम्मान देता आया है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई व्यक्ति अपनी मां को अलग से माता घोषित नहीं करता, उसी प्रकार गाय भी भारतीय संस्कृति में पहले से पूजनीय है। उन्होंने देशभर में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक विषय भी है।
लखनऊ में चल रही रामकथा के दौरान दिए गए इन विचारों के माध्यम से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने धर्म, समाज, राजनीति और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उनके वक्तव्य को बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना। रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए संतों, युवाओं और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। यदि सभी अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करें तो समाज और राष्ट्र दोनों अधिक मजबूत और समृद्ध बन सकते हैं।