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मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने किया केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व

उन्होंने कर्नाटक को धन नहीं देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को जिम्मेदार ठहराया और उन्हें अपने-अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होने का आरोप लगाया।

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सूखा-राहत जारी करने में कर्नाटक के हितों की अनदेखी करने का आरोप

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सूखा-राहत जारी करने में कर्नाटक के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। प्रदर्शनकारियों ने बैक मोदी और गो बैक अमित शाह के नारे लगाए और कहा कि उन्हें कर्नाटक में वोट मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री के साथ मंत्री-रामलिंगा रेड्डी, कृष्ण बैरेगौड़ा, एन.एस. बोसराजू और के.जे. जॉर्ज सहित कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं ने विधानसौधा में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने तख्तियां लेकर मोदी और शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध के बाद सिद्धरामय्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केवल वोट मांगने के लिए चुनावों के दौरान कर्नाटक याद करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी ने बाढ़ के समय दौरा नहीं किया, जब बी.एस. येडियूरप्पा राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार चला रहे थे। अब, राज्य भयंकर सूखे की चपेट में है, लगभग 100 वर्षों में इतना गंभीर सूखा नहीं देखा गया है, लेकिन मोदी ने यहां की स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा नहीं किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, अमित शाह को सूखा राहत के लिए 18,172 करोड़ रुपए जारी करने के बाद राज्य का दौरा करने दें। मुख्यमंत्री ने कहा, सूखा राहत के अलावा, राज्य सरकार ने बेंगलूरु शहर में परिधीय रिंग रोड निर्माण के लिए 3,000 करोड़ रुपए मांगे थे और बेंगलूरु में झीलों को विकसित करने के लिए भी धन मांगा था, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा, यह राज्य की एक वैध मांग रही है। उन्होंने कर्नाटक को धन नहीं देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को जिम्मेदार ठहराया और उन्हें अपने-अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होने का आरोप लगाया।

सिद्धरामय्या ने कहा कि राज्य सरकार ने कर्नाटक में सूखे की स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला है और पीने के पानी की समस्या, चारे की समस्या, लोगों के प्रवासन को रोका है और राज्य सरकार ने राज्य के प्रभावित किसानों को सूखा राहत की पहली किस्त का भुगतान भी किया है।