
बरेली। वर्ष 2030 और 2035 तक सात प्रतिशत से अधिक सतत आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने कृषि, शोध और नवाचार को विकास का मुख्य आधार बनाने का खाका तैयार कर लिया है। गुरुवार को आईवीआरआई में आयोजित आईएएवीआरसीओएन-2026 नेशनल सिंपोजियम में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि कृषि और पशुधन ही आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रीढ़ साबित होंगे।
मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि रिसर्च-ड्रिवन ग्रोथ से पूरा होगा। कृषि विकास, लाइवस्टॉक सुधार और वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शोध और इनोवेशन की निर्णायक भूमिका होगी।
डॉ. दत्त ने बताया कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए फोकस एरिया की पहचान कर ली गई है। इसमें कृषि में तकनीकी नवाचार, पशुधन उत्पादकता में वृद्धि, आधुनिक भंडारण अवसंरचना का विकास और गुणवत्ता आधारित निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि अब केवल उत्पादन नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जाएगा, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें। सर्विस टेक्नोलॉजी, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और एग्री-स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिए जाने की रणनीति तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि आधारित उद्योगों को वैज्ञानिक शोध से जोड़ा गया तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों को चरणबद्ध रूप से पूर्ण विकसित विश्वविद्यालयों में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई है। डीम्ड विश्वविद्यालयों की मौजूदा व्यवस्था को समय के साथ समाहित कर उन्हें व्यापक और बहु-विषयी शैक्षणिक ढांचे में शामिल किया जाएगा। लक्ष्य है कि वर्ष 2035 से 2040 तक प्रत्येक विश्वविद्यालय में लगभग 3000 छात्रों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। कैंपस और आउटरीच गतिविधियों का विस्तार कर शिक्षा को अधिक शोध-आधारित और उद्योगोन्मुख बनाया जाएगा।
डॉ. दत्त ने बताया कि सरकार ने शिक्षा पर व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक ले जाने का संकल्प लिया है। वहीं अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर खर्च को 0.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.1 प्रतिशत करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर करेगा बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति को भी मजबूत बनाएगा। फैकल्टी, स्टाफ और विद्यार्थियों से इस परिवर्तनकारी दौर में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।
कुलपति ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाएं और अकादमिक संवाद रोडमैप तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आरएंडडी, अकादमिक और आउटरीच गतिविधियों के समन्वय से शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख और व्यावसायिक बनाया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और समर्पित प्रयासों के जरिए ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। आईवीआरआई में आयोजित यह संगोष्ठी इसी दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी। कार्यक्रम में देश के विभिन्न कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में माना कि कृषि आधारित अनुसंधान और पशुधन सुधार ही आगामी दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि को नई ऊंचाई देंगे।
Published on:
12 Feb 2026 02:44 pm
बड़ी खबरें
View Allबरेली
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
