
पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू
जयपुर ग्रामीण में पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिले की 22 पंचायत समितियों में पंचायत समिति सदस्यों के कुल 386 वार्डों का अंतिम प्रकाशन हो चुका है। इसके साथ ही ग्रामीण राजनीति की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। इस बार सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि बस्सी और चौमूं पंचायत समितियों में 25-25 वार्ड बनाए गए हैं, जिससे ये दोनों समितियां वार्ड संख्या के लिहाज से जिले में सबसे बड़ी बन गई हैं। पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव मतदाता सीधे मतदान के जरिए करेंगे, जबकि निर्वाचित सदस्य बाद में पंचायत समिति के प्रधान और उपप्रधान का चुनाव करेंगे। जयपुर जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने आमजन से प्राप्त आपत्तियों व सुझावों के निस्तारण के बाद पंचायत समिति वार्डों का अंतिम प्रकाशन किया है। इसके साथ ही अब चुनावी प्रक्रिया की अगली कड़ियों का रास्ता भी साफ हो गया है।
वार्ड तय, अब आरक्षण की उलटी गिनती
वार्डों के अंतिम प्रकाशन के साथ ही ग्रामीण राजनीति में सक्रिय नेताओं की निगाहें अब आरक्षण की लॉटरी पर टिक गई हैं। यह लॉटरी न केवल पंचायत समिति सदस्य वार्डों की होगी, बल्कि प्रधान पद के आरक्षण का फैसला भी इसी प्रक्रिया से होगा। किस पंचायत समिति में प्रधान पद सामान्य रहेगा और कहां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या महिला के लिए आरक्षित होगा, यह फैसला पूरे राजनीतिक समीकरणों को बदल देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कई संभावित प्रत्याशी वर्षों से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तय होगा कि कौन मैदान में उतरेगा और कौन पीछे हटेगा।
प्रधान पद का महत्व
ग्रामीण राजनीति में सरपंच के बाद पंचायत समिति प्रधान का पद सबसे अहम माना जाता है। जानकारों के अनुसार प्रभाव और प्रतिष्ठा के लिहाज से यह पद विधायक और जिला प्रमुख के बाद तीसरे पायदान पर आता है। पंचायत समिति क्षेत्र में विकास योजनाओं की स्वीकृति, क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय में प्रधान की भूमिका निर्णायक रहती है। हालांकि प्रधान वही बन सकता है, जो पहले पंचायत समिति सदस्य का चुनाव जीतकर आए।
भाजपा-कांग्रेस की रणनीति, निर्दलीयों की तैयारी
पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पद के चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। दोनों दल अपने समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे, वहीं बाद में प्रधान पद के लिए भी समर्थन तय किया जाएगा। हालांकि यह चुनाव पार्टी सिंबल और निर्दलीय प्रत्याशियों-दोनों के जरिए लड़ा जाता है। कई क्षेत्रों में स्थानीय प्रभाव, सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत पकड़ निर्णायक साबित होती है। इसी कारण कई पूर्व सरपंच और स्थानीय नेता निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं।
इन पंचायत समितियों में इतने वार्ड
जयपुर ग्रामीण की पंचायत समिति बस्सी और चौमूं में 25-25, जमवारामगढ़ में 23, आमेर में 21, आंधी, जोबनेर, गोविंदगढ़ व किशनगढ़ रेनवाल में 19-19, चाकसू व मौजमाबाद में 17-17, सांभरलेक में 17, जबकि तूंगा, कोटखावदा, रामपुरा डाबड़ी, जालसू, दूदू, शाहपुरा, अमरसर, फागी, झोटवाड़ा, माधोराजपुरा व सांगानेर में 15-15 वार्ड बनाए गए हैं।
Updated on:
28 Jan 2026 06:04 pm
Published on:
28 Jan 2026 05:58 pm

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